आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिपर प्रकृति का अनूठा चमत्कार दिखाया गया है। इसका जिक्र किताबों में भी मुश्किल से मिलता है। इसे 'सिक्किम सुंदरी' के नाम से जाना जाता है। इस पौधे को ब्रह्मकमल जैसी दुर्लभ प्रजातियों के समान माना जाता है।
सिक्किम सुंदरी एक बेहद दुर्लभ हिमालयी पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम Rheum nobile है। यह पौधा सिक्किम और आसपास के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। इसे ग्लासहाउस प्लांट भी कहा जाता है।
सिक्किम सुंदरी बहुत ऊंचाई पर उगने वाला पौधा है। यह समुद्र तल से 4,000 से 4,800 मीटर की ऊंचाई पर उगता है। और भी बेहद ठंडे और कठिन मौसम में। यह प्लांट चट्टानी और बर्फीले इलाकों में ही मिलता है। इसे स्थानीय लोग 'चुका' भी कहते हैं।
इस पौधे की पत्तियां पारदर्शी (ट्रांसलूसेंट) होती हैं। ये पत्तियां इसे तेज धूप से बचाती हैं जिससे यह कड़ाके की ठंड में गर्मी बनाए रखता है। इसी वजह से इसे 'ग्रीनहाउस प्लांट' का भी नाम दिया गया है।
सिक्किम सुंदरी के नाम से मशहूर यह पौधा 7 से 30 साल तक जमीन के अंदर ऊर्जा जमा करता है। इस दौरान यह छोटे पत्तियों के एक गुच्छे के तौर पर नजर आता है। जीवन में यह पौधा एक ही बार बीज छोड़ता है और फिर समाप्त हो जाता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में मोनोकार्पिक पौधा कहा जाता है।
इस पौधे का पारंपरिक उपयोग तिब्बती चिकित्सा में होता है। स्थानीय लोग इसकी जड़ें और तना इस्तेमाल करते हैं। वहीं इसे हिमालय की जैव विविधता का अनमोल खजाना माना जाता है।
आनंद महिंद्रा ने इस पौधे को देखने को धैर्य और सहनशीलता की मिसाल बताया है। सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता को सराहते हुए उन्होंने सवाल भी उठाया कि ऐसी प्राकृतिक धरोहरों के बारे में हमारी किताबों में क्यों नहीं पढ़ाया जाता है।