जब बच्चा मोबाइल पर कार्टून या वीडियो देखता है, तो उसका ध्यान खाने के बजाय स्क्रीन पर रहता है। ऐसे में उसे यह समझने में परेशानी हो सकती है कि वह कितना खा रहा है और उसका पेट भर चुका है या नहीं।
बच्चों को भूख लगने और पेट भरने का एहसास समझना सीखना जरूरी है। लेकिन स्क्रीन देखते हुए खाना खाने से उनका ध्यान शरीर के इन संकेतों से हट सकता है। इससे कुछ बच्चे जरूरत से ज्यादा या कम खाना खा सकते हैं।
कई बार बच्चे वीडियो देखने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि माता-पिता के कहने पर जल्दी-जल्दी खाना निगलने लगते हैं। इससे खाना ठीक से चबाने की आदत विकसित नहीं हो पाती।
अगर बच्चे को हर बार खाना खिलाने के लिए मोबाइल की जरूरत पड़ने लगे, तो वह बिना स्क्रीन के खाना खाने से मना कर सकता है। धीरे-धीरे खाना खाने के बजाय वीडियो देखने की जिद उसकी आदत बन सकती है।
खाना सिर्फ पेट भरने का तरीका नहीं है। बच्चे को अलग-अलग स्वाद, खुशबू और खाने की बनावट पहचानना भी सीखना चाहिए। मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण वह इन अनुभवों पर ध्यान नहीं दे पाता।
खाने के समय मोबाइल देने से बच्चे का रोजाना स्क्रीन टाइम भी बढ़ सकता है। धीरे-धीरे वह खेलते समय, आराम करते समय और यहां तक कि दूसरी गतिविधियों के दौरान भी फोन मांगने लग सकता है। इसलिए भोजन के समय स्क्रीन से दूरी रखना बेहतर है।
बच्चों को बिना मोबाइल खाना खिलाना है। तो उनके साथ बैठकर बातचीत कर खाना खाएं, भोजन को अच्छे से सर्व करें, जल्दीबाजी न करें और पेरेंट्स भी फोन से दूर रहें।