कई बच्चे दूध पीकर जल्दी और गहरी नींद लेते हैं। इसकी वजह है दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन, जो शरीर को रिलैक्स करता है। इसलिए जिन बच्चों को दूध पीकर नींद अच्छी आती है, उनके लिए यह आदत फायदेमंद हो सकती है।
हर बच्चे की बॉडी अलग होती है। कुछ बच्चों को दूध पीकर तुरंत नींद आ जाती है, जबकि कुछ दूध पीने के बाद गैस, भारीपन या एसिडिटी महसूस कर सकते हैं। ऐसे बच्चों के लिए सोने से पहले दूध देना उल्टा असर कर सकता है।
डॉक्टर्स की सबसे बड़ी चिंता बोतल कैरीज़ यानी दूध की वजह से दांत खराब होना है। अगर बच्चा दूध पीकर तुरंत सो जाता है और उसके दांत ठीक से साफ नहीं होते, तो दूध में मौजूद शुगर दांतों में चिपककर कैविटी बना सकती है। अगर आप दूध दे ही रहे हैं तो सोने से पहले दांत जरूर साफ करवाएं।
अगर बच्चा छोटा है (1 साल से कम) और अभी ठोस आहार पूरी तरह शुरू नहीं हुआ। 2. बच्चा दूध के बाद रिलैक्स होकर सो जाता है। 3. बच्चे को रात में भूख लगती है और वह सो नहीं पाता। 4. दांत साफ करवाने की आदत पेरेंट्स रोज निभाते हैं।
इन चार हालात में ही सोने से पहले दूध दें: बच्चा 2–3 साल से बड़ा है और ठोस भोजन ठीक से लेने लगा है। दूध पीकर बच्चे को गैस, उलझन या एसिडिटी होती है। बच्चा रात में सिर्फ आदत या आराम के लिए बोतल पकड़कर सोता है। बच्चा बार-बार नाइट फीडिंग पर निर्भर हो रहा है।
डॉक्टर्स के अनुसार, सोने से 30–45 मिनट पहले दूध देना सबसे सही है। इससे बच्चा पेट भरकर सोता है। दांत साफ करने का समय भी मिल जाता है। नींद की रूटीन भी सेट रहती है
सोने से पहले दूध देना गलत नहीं है, लेकिन समझदारी से। अपने बच्चे की जरूरत, पाचन, आदत और उम्र देखकर ही तय करें। याद रखें, हर बच्चे की बॉडी अलग है, इसलिए वही तरीका सही है जो आपके बच्चे को आराम और अच्छी नींद दे।