भारतीय खाने की परंपरा में बासी रोटी का इतिहास भी उतना ही पुराना है जितना रोटी का। एक दिन पुरानी रोटी को बासी रोटी कहते हैं। कभी तंगी और बदहाली से निकली ये रोटी बहुत फायदेमंद होती है, वो भी सभी के लिए।
रोटी कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है। गेहूं में बी-विटामिन, आयरन, मैग्नीशियम और जिंक जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी होते हैं, ये मेटोबॉलिज्म को दुरुस्त करते हैं। दिन की शुरुआत इससे करने से बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता।
बच्चों, बुजुर्गों या कमजोर पाचन क्षमता वाले लोगों के लिए बासी रोटी एक शानदार ब्रेकफास्ट है। रोटी रात भर में फर्मेंट होकर पहले से कहीं आसानी से पचने लायक हो जाती है और इससे कुछ प्रोबायोटिक भी मिलते हैं।
बासी रोटी में रोटी के सारे गुण तो होते ही हैं साथ ही ये आसानी से पचने भी लगती है। ये मेटोबॉलिज्म को तेज करती है और आंतों के लिए भी फायदेमंद होती है। इसमें पाए जाने वाले प्रोबायोटिक खाने से पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता को बेहतर करते हैं।
बासी रोटी को जरूरतों के हिसाब से कई तरह से परोसा जा सकता है। गर्म मौसम में इसे ठंडी दही या दूध के साथ खाया जा सकता है। इसे अचार, गुड़ या चीनी के साथ भी खाया जा सकता है। दही के साथ खाने पर इसके प्रोबायोटिक गुण बढ़ जाते हैं।
वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए, यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पेट भरने वाला भोजन है जो भूख को कंट्रोल करने और मेटाबॉलिज्म तेज करने में मदद करता है।
ये डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद है। बासी रोटी को फिर गर्म करने पर इसके कार्बोहाइड्रेट्स बदल जाते हैं। जिस वजह से कार्बोहाइड्रेट्स का शुगर में बदलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और बल्ड शुगर स्पाइक नहीं होता।