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कौन हैं सौरव दास और आशुतोष रांका, कैसे बने CJP का चेहरा और रणनीतिकार?

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ हुई अहम बैठकों में CJP का प्रतिनिधित्व सौरव दास और आशुतोष रांका ने किया था। आइए समझते हैं कि आंदोलन के केंद्र में आए ये नए चेहरे कौन हैं और इस बीच अचानक चर्चा में आए विजेता दहिया को क्यों बाहर का रास्ता देखना पड़ा।

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कौन हैं सौरव दास और आशुतोष रांका, कैसे बने CJP का चेहरा और रणनीतिकार?
Authored by: Amit Mandal
Updated Jul 26, 2026, 14:47 IST
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CJP Protest: भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन अपने पहले दौर में पूरी तरह कामयाब रहा है। सड़कों पर मचे घमासान के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ और सरकार को सीजेपी की मांगें माननी पड़ी। भारी दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा जिसके बाद छात्रों ने आंदोलन वापस ले लिया। दिलचस्प बात यह है कि जहां इस आंदोलन के सूत्रधार और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा संभाले हुए थे, वहीं केंद्र सरकार के साथ टेबल पर बैठकर बातचीत करने की जिम्मेदारी दो नए चेहरों के कंधों पर आ गई थी। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ हुई अहम बैठकों में CJP का प्रतिनिधित्व सौरव दास और आशुतोष रांका ने किया था। आइए समझते हैं कि आंदोलन के केंद्र में आए ये नए चेहरे कौन हैं और इस बीच अचानक चर्चा में आए विजेता दहिया को क्यों बाहर का रास्ता देखना पड़ा।

कौन हैं सौरव दास: आंदोलन की कड़क आवाज और मुख्य प्रवक्ता

सौरव दास इस समय 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुख्य प्रवक्ता हैं और सरकार के साथ बातचीत में सबसे आगे रहे। पेशे से एक खोजी पत्रकार रहे सौरव को CJP ने जून में देशव्यापी प्रदर्शनों से ठीक पहले अपने मुख्य कम्युनिकेटर के तौर पर पेश किया था। उन्होंने कानूनी, न्यायिक और सामाजिक मुद्दों पर काफी काम किया है। सौरव ने साल 2016 से 2019 के बीच नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से 'जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन' में बीए (BA) किया है। वह पहले भी प्रदूषण विरोधी अभियानों जैसे नागरिक आंदोलनों का हिस्सा रह चुके हैं।

आंदोलन में भूमिका: जब से यह आंदोलन तेज हुआ है, सौरव CJP का सबसे जाना-माना चेहरा बन चुके हैं। मीडिया को ब्रीफिंग देना, पार्टी की मांगों को तार्किक रूप से रखना और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ बातचीत की मेज पर छात्रों का पक्ष रखना—ये सब सौरव ही संभाल रहे थे।

कौन हैं आशुतोष रांका: आंदोलन के पीछे का 'पॉलिसी माइंड'

अगर सौरव दास इस आंदोलन की आवाज हैं, तो आशुतोष रांका इसके पीछे का दिमाग हैं। वह CJP के आधिकारिक प्रवक्ता हैं और शिक्षा सुधारों को लेकर नीतिगत खाका तैयार कर रहे हैं। आशुतोष का प्रोफाइल बेहद मजबूत है। वह देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर और दुनिया के टॉप कॉलेजों में शुमार लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) के छात्र रह चुके हैं।

कॉर्पोरेट से आंदोलन तक: CJP की कम्युनिकेशन टीम में शामिल होने से पहले आशुतोष लंदन में मशहूर ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म मैकिन्से एंड कंपनी (McKinsey & Company) में बतौर कंसलटेंट काम कर रहे थे।

आंदोलन में भूमिका: जून में जब CJP ने अपने प्रवक्ताओं के पैनल का एलान किया था, तभी साफ कर दिया था कि आशुतोष की पढ़ाई और अनुभव का इस्तेमाल शिक्षा सुधारों पर सरकार के सामने मजबूत दलीलें रखने के लिए किया जाएगा। यही वजह है कि सौरव दास के साथ जे.पी. नड्डा से वार्ता करने के लिए आशुतोष को ही भेजा गया।

बैकस्टेज हीरो: जहां सौरव और आशुतोष सरकार से बातचीत कर रहे हैं, वहीं बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके जंतर-मंतर पर जमीन पर रहकर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। गौरतलब है कि बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से किए जाने वाले एक बयान के वायरल होने के बाद दिपके ने इस अनोखे नाम (कॉकरोच जनता पार्टी) के साथ संगठन की शुरुआत की थी।

विजेता दहिया को क्यों हटाया गया?

इस आंदोलन में जहां सौरव और आशुतोष का कद बढ़ा है, वहीं CJP के तीसरे आधिकारिक प्रवक्ता विजेता दहिया को एक विवाद के बाद पद से सस्पेंड कर दिया गया। विजेता दहिया एक लेखक, फिल्ममेकर और डिजिटल कंटेंट प्लेटफॉर्म्स के पूर्व रिसर्चर हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में CJP ने उन्हें अपने प्रमुख चेहरों के रूप में प्रोजेक्ट किया था।

क्या था विवाद?

संसद के पास जब दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और कार्रवाई कर रही थी, ठीक उसी समय सोशल मीडिया पर विजेता दहिया का एक वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो में वह आराम से बैठकर 'बर्गर' खाते हुए दिखाई दे रहे थे और इसे लेकर अपने तर्क भी दे रहे थे। इस वीडियो के सामने आते ही आंदोलनकारी छात्रों में नाराजगी फैल गई। CJP ने विजेता के इस व्यवहार को बेहद संवेदनशील समय में "असंवेदनशील और आंदोलन के मूल्यों के खिलाफ" माना और तुरंत उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया।

विजेता का पक्ष: पद से हटाए जाने के बाद विजेता दहिया ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की जा रही आलोचनाएं राजनीति से प्रेरित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उनके हटने से आंदोलन और छात्रों के बड़े मकसद को फायदा होता है, तो वह पार्टी के इस फैसले को स्वीकार करते हैं।

अब आगे क्या?

CJP का यह आंदोलन अब महज एक छात्र प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि एक सुव्यवस्थित राजनीतिक और नीतिगत दबाव समूह का रूप ले चुका है। एक तरफ जहां आशुतोष और सौरव जैसी पढ़ी-लिखी और प्रोफेशनल तिकड़ी सरकार को टेबल पर चुनौती दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अनुशासन को लेकर सख्त रवैया (जैसा विजेता दहिया के मामले में दिखा) यह साफ करता है कि छात्र इस बार लंबी लड़ाई के मूड में हैं। दिपके ने आज (26 जुलाई 2026) को वीडियो संदेश में भी साफ कर दिया है कि सीजेपी को अभी बहुत आगे जाना है। यानी सीजेपी आने वाले समय में सियासत के मैदान में दिखाई पड़े तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए।

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