प्रेग्नेंसी में जहरीली हवा से रहें सावधान, बच्चे के जन्म और विकास पर पड़ सकता है असर

Air Pollution During Pregnancy: गर्भावस्था में खानपान और दवाओं का ध्यान रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी साफ हवा में सांस लेना भी है। प्रदूषण मां और बच्चे दोनों की सेहत प्रभावित कर सकता है।

Authored by: prabhat sharmaUpdated Oct 31 2026, 13:45 IST
​गर्भावस्था में प्रदूषण का खतरा​Image Credit : Canva01 / 07

​गर्भावस्था में प्रदूषण का खतरा​

आज वायु प्रदूषण केवल पर्यावरण से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह मां और बच्चे की सेहत के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण और घर के अंदर मौजूद धुआं गर्भवती महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। इस बारे में डॉ. पल्लवी वसाल, क्लिनिकल डायरेक्टर- ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनीकॉलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान स्वच्छ हवा में सांस लेना भी उतना ही जरूरी है, जितना सही खानपान और नियमित स्वास्थ्य जांच।

गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर क्या पड़ता है असरImage Credit : Canva02 / 07

गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर क्या पड़ता है असर

गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास कई बातों पर निर्भर करता है। इस दौरान प्लेसेंटा यानी गर्भनाल से जुड़ी व्यवस्था के जरिए बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। प्रदूषण के कारण शरीर में होने वाली सूजन और दूसरी जैविक प्रक्रियाएं इस व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वायु प्रदूषण के संपर्क का संबंध समय से पहले प्रसव, कम जन्म वजन और गर्भावधि के हिसाब से बच्चे का आकार छोटा होने जैसी समस्याओं से पाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदूषित हवा के संपर्क में आने वाली हर महिला को इन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। गर्भावस्था से जुड़े परिणाम कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करते हैं। फिर भी, प्रदूषण के खतरे को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

​सिर्फ बच्चे ही नहीं, मां की सेहत पर भी पड़ता है असर​Image Credit : Canva03 / 07

​सिर्फ बच्चे ही नहीं, मां की सेहत पर भी पड़ता है असर​

गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर पहले से ही कई शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है। ऐसे में प्रदूषण के संपर्क में आने से सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। खासकर जिन महिलाओं को पहले से अस्थमा या सांस लेने से जुड़ी कोई समस्या है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कुछ अध्ययनों में वायु प्रदूषण के संपर्क का संबंध गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और अन्य जटिलताओं से भी सामने आया है। डॉ. पल्लवी वसाल के अनुसार, गर्भावस्था में मां की सेहत का ध्यान रखना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसका असर गर्भस्थ शिशु के विकास पर भी पड़ सकता है। प्रदूषण का प्रभाव हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता। इसलिए सांस लेने में परेशानी न होने का मतलब यह नहीं है कि प्रदूषण से कोई खतरा नहीं है।

​PM2.5 जैसे बारीक प्रदूषक कण क्यों हैं चिंताजनक​Image Credit : Canva04 / 07

​PM2.5 जैसे बारीक प्रदूषक कण क्यों हैं चिंताजनक​

हवा में मौजूद सभी प्रदूषक एक जैसे नहीं होते। PM2.5 ऐसे बेहद छोटे कण होते हैं, जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। इतने छोटे होने के कारण ये सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। इन कणों के संपर्क में आने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ सकता है। इसका असर फेफड़ों और हृदय संबंधी स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान ये स्थितियां चिंता बढ़ाती हैं, क्योंकि इस समय मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा होता है। इसलिए सिर्फ बाहर दिखाई देने वाले धुएं से बचना ही काफी नहीं है। घर के अंदर मौजूद धुआं और प्रदूषण भी ध्यान देने वाली बात है।

​गर्भवती महिलाएं प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें​Image Credit : Canva05 / 07

​गर्भवती महिलाएं प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें​

प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं है, लेकिन कुछ आसान उपाय अपनाकर इसके संपर्क को कम किया जा सकता है। AQI चेक करें: घर से बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जरूर देखें। प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर की गैरजरूरी गतिविधियों से बचें। N95 मास्क पहनें: अगर प्रदूषण के बीच बाहर निकलना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। यह हवा में मौजूद बारीक कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है। घर के अंदर धुआं न होने दें: घर में धूम्रपान, कचरा जलाने और अगरबत्ती या अन्य चीजों से निकलने वाले अनावश्यक धुएं से बचें। वेंटिलेशन का ध्यान रखें: खाना बनाते समय रसोई में उचित वेंटिलेशन रखें, ताकि धुआं घर के अंदर जमा न हो।

​नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह को न करें नजरअंदाज​Image Credit : Canva06 / 07

​नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह को न करें नजरअंदाज​

गर्भावस्था में नियमित प्रसवपूर्व जांच यानी एंटीनैटल चेकअप बेहद जरूरी है। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर नजर रखने में मदद मिलती है। प्रदूषण ज्यादा होने वाले इलाकों में रहने वाली महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए। अगर सांस फूलने, सीने में दर्द, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। इसके अलावा, अगर महिला को पहले से अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या सांस से जुड़ी कोई परेशानी है, तो उसे अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी देनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा लेना या अपनी नियमित दवाएं बंद करना भी सही नहीं है।

​स्वच्छ हवा में सांस लेना भी गर्भावस्था की देखभाल का हिस्सा​Image Credit : Canva07 / 07

​स्वच्छ हवा में सांस लेना भी गर्भावस्था की देखभाल का हिस्सा​

डॉ. पल्लवी वसाल के मुताबिक, गर्भावस्था को केवल नौ महीने की यात्रा समझना सही नहीं है। यह एक नए जीवन की नींव रखने का समय है। इस दौरान बेहतर पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और अच्छी जीवनशैली के साथ स्वच्छ हवा को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। गर्भ में पल रहा बच्चा अपनी सुरक्षा के लिए खुद कुछ नहीं कर सकता। ऐसे में उसकी सेहत की जिम्मेदारी केवल मां या परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की भी है। हमें यह समझना होगा कि स्वच्छ हवा कोई लग्जरी नहीं, बल्कि हर इंसान की बुनियादी जरूरत है। एक स्वस्थ बच्चे के भविष्य की शुरुआत गर्भावस्था से ही होती है। इसलिए मां और बच्चे की बेहतर सेहत के लिए प्रदूषण के प्रति जागरूक होना और इसके संपर्क को कम करने की कोशिश करना बेहद जरूरी है।

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