अकसर लोगों को लगता है कि डायनासोर के समय का जीव कोई और नहीं बल्कि मगरमच्छ है। ये बात सच है कि मगरमच्छ बेहद पुराना जीव है लेकिन इस जीव के अलावा भी एक ऐसा जीव है, जो धरती पर डायनासोर के समय से है। ये है- लेदरबैक सी टर्टल, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री कछुआ भी माना जाता है।
लेदरबैक सी टर्टल की सबसे खास बात है इसकी बनावट। आम कछुओं की तरह इसका खोल कठोर नहीं होता बल्कि चमड़े जैसा नरम और मजबूत होता है। इसी वजह से इसे लेदरबैक नाम दिया गया है। इसका वजन 500 किलो से भी ज्यादा तक हो सकता है और ये हजारों किलोमीटर तक समुद्र में सफर कर सकता है।
खास बात है कि ये कछुआ बेहद ठंडे पानी में भी जिंदा रह सकता है, जो इसे दूसरे समुद्री कछुओं से अलग बनाता है। वैज्ञानिकों का भी मानना है कि इसकी यही खासियत इसे करोड़ों से सालों तक अस्तित्व में रखने में मददगार रही है। हालांकि ये प्रजाति आज खतरे में मानी जाती है। समुद्री प्रदूषण, प्लास्टिक और शिकार की वजह से इन जीवों की संख्या तेजी से घट रही है।
लेदरबैक सी टर्टल सिर्फ एक जीव नहीं बल्कि धरती के इतिहास का एक जीवित उदाहरण है। ये हमें याद दिलाता है कि प्रकृति कितनी अद्भुत और रहस्यमयी है। ये देखने में बेहद ही अलग लगते हैं।
लेदरबैक कछुए दूसरे समुद्री कछुओं की तुलना में काफी अलग दिखते हैं। ज्यादातर कछुओं के खोल के उलट इनके खोल काफी मोटे, गहरे रंग के और गोल स्किन से ढके हुए होते हैं। इनकी पीठ पर सफेद धब्बे होते हैं और शरीर पर कई लंबी और लहरदार धारियां होती हैं, जो कछुए को पानी में चलते समय खुद को आकार देने में मदद करती है।
इसकी लंबाई करीब 7 फीट तक और वजन 500 किलो से ज्यादा हो सकता है। ये सामान्य कछुओं से अलग होता है क्योंकि इसके शरीर पर कठोर खोल नहीं बल्कि चमड़े जैसी मोटी और मजबूत त्वचा होती है। यही वजह है कि इसे 'लेदरबैक' कहा जाता है।