दुनिया में सिक्कों से कागज के नोटों का सफर सबसे पहले चीन ने तय किया था। जी हां, चीन ही वह देश है, जहां सबसे कागजी मुद्रा की शुरुआत हुई थी।
माना जाता है कि चीन के तांग राजवंश द्वारा 7वीं से 10वीं शताब्दी में तांबे के सिक्कों की बजाए प्रोमिसरी नोट्स का प्रयोग किया गया। जिसके बाद यह धीरे-धीरे अन्य देशों में भी शुरू हो गई।
कागजी नोट्स को फ्लाइंग मनी के नाम से इसलिए जाना गया था क्योंकि यह इतने हल्के होते थे कि उन्हें हवा में उड़ाया जा सकता था।
आधिकारिक तौर पर नोट्स की शुरुआत जियाओजू के रूप में 1024 यानी 11वीं शताब्दी में सोंग राजवंश के दौरान हुई थी।
भले ही चीन में कागजी मुद्रा की शुरुआत 7वीं से 10वीं शताब्दी के बीच हुई थी, लेकिन 13वीं शताब्दी में युआन राजवंश के समय में इसका प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया था।
13वीं शताब्दी में युआन राजवंश के दौरान इटालियन यात्री मार्को पोलो चीन की यात्रा के लिए आए थे। उन्होंने यहां इस्तेमाल हो रहे कागजी नोटों को देखा और वह हैरान रह गए। जब वह यहां से यूरोप वापस गए, तो उन्होंने इसकी जानकारी दी और इस प्रकार चीन से कागजी नोट बाहर निकला।
भारत में कागजी नोट की शुरुआत 18वीं शताब्दी के अंत में हुई थी। सबसे पहले कागजी नोट बैंक ऑफ हिंदुस्तान द्वारा जारी किए गए थे। उसके बाद 1861 में पेपर करेंसी एक्ट बनाया गया, जिससे ब्रिटिश सरकार के पास नोट छापने का अधिकार पहुंचा।