भारत में EVM का इस्तेमाल 1990 के दशक से शुरू हुआ था। एक EVM में तकनीकी रूप से लगभग 2,000 वोट रिकॉर्ड किए जा सकते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी मशीन में 1,400 से अधिक वोट नहीं डाले जाते। इसी आधार पर मतदान केंद्रों की संख्या तय की जाती है, ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।
मतदान समाप्त होने के बाद सभी EVM को कड़ी सुरक्षा के बीच एक ऐसी जगह रखा जाता है, जिसे “स्ट्रॉन्ग रूम” कहते है। यह एक विशेष सुरक्षित कमरा होता है, जिसे दोहरी सील के साथ बंद किया जाता है। पूरी प्रक्रिया चुनाव अधिकारियों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होती है। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर CCTV कैमरों से निगरानी रखी जाती है, जबकि अंदर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होती।
वोटों की गिनती पूरी होने और विजेता उम्मीदवार घोषित होने के बाद भी EVM तुरंत नहीं हटाई जातीं। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, उम्मीदवारों को परिणाम के खिलाफ पुनर्गणना या दोबारा जांच की मांग करने के लिए 45 दिन का समय दिया जाता है। कई बार जीत और हार का अंतर बहुत कम होता है, इसलिए यह अवधि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इन 45 दिनों तक EVM उसी स्ट्रॉन्ग रूम या सुरक्षित स्थान पर रखी जाती हैं। उनकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल तैनात रहते हैं। यदि इस दौरान किसी उम्मीदवार की ओर से पुनर्गणना की मांग नहीं आती, तो बाद में मशीनों को सुरक्षित स्टोरेज सेंटर में भेज दिया जाता है।
इसके बाद चुनाव आयोग के इंजीनियर EVM की तकनीकी जांच करते हैं। मशीनों की कई चरणों में टेस्टिंग होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अगले चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं। चूंकि देश में अलग-अलग राज्यों में लगातार चुनाव होते रहते हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर EVM को एक राज्य से दूसरे राज्य में भी भेजा जाता है।
नए चुनाव से पहले EVM का “मॉक टेस्ट” कराया जाता है। इसमें उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीनों की जांच की जाती है। सभी जरूरी परीक्षण पूरे होने के बाद ही मशीनों को चुनाव के लिए प्रमाणित किया जाता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, कुल EVM का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व यानी स्टैंडबाय में रखा जाता है, ताकि किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में तुरंत दूसरी मशीन का इस्तेमाल किया जा सके। वहीं, जो मशीनें खराब या अनुपयोगी पाई जाती हैं, उन्हें पूरी प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया जाता है।