राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के घोसुंडा गांव में रहने वाले रामलाल का सपना बचपन से डॉक्टर बनने का रहा है। उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी और आखिरकार उसे पूरा करके दिखाया।
राजस्थान का रामलाल की कहानी किसी को भी चौंका सकती है। वह जब कक्षा 6 में पढ़ रहे थे, तब उनकी शादी करा दी गई थी। तब उनकी उम्र महज 11 वर्ष थी। परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के बीच शादी ने उनके जीवन को बदल दिया। लेकिन इस बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कक्षा 10वीं में 74 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
कक्षा 10वीं में रामलाल बोई के 74 प्रतिशत अंक थे। वह इस दुविधा में थे की 11वीं में साइंस ले या आर्ट्स-कॉमर्स। उनकी इस दुविधा और साइंस में अच्छी पकड़ को देख एक टीचर ने उन्हें साइंस के साथ बायोलॉजी लेने की सलाह दी। इस विषय को लेने के बाद से ही रामलाल ने डॉक्टर बनने का फैसला लिया। उन्होंने 11वीं और 12वीं की शिक्षा उदयपुर के एक हॉस्टल में रह कर पूरी की और साथ ही नीट यूजी की तैयारी भी शुरू की। उन्होंने यहां सेल्फ स्टडी पर भरोसा जताया।
रामलाल नीट के पहले तीन प्रयासों में असफल रहे। उन्होंने तीन अटेम्प्ट में 350, 320 और 362 अंक प्राप्त हुए थे। उनकी असफलता को देख परिवार ने उन पर पढ़ाई छोड़ने और कमाई करने का दबाव बनाना शुरू किया।
परिवार के दबाव के बीच भी रामलाल ने पढ़ाई नहीं छोड़ी और नीट की तैयारी जारी रखी। उनकी इस डेडिकेशन को देख परीक्षा ने भी उन्हें सपोर्ट करना शुरू कर दिया। चौथ अटेम्प्ट के लिए रामलाल कोटा कोचिंग लेने के लिए गए।
कोचिंग लेकर चौथे अटेम्प्ट में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन बीते तीन अटेम्प्ट की तुलना में इस बार उनके अंक में अच्छा सुधार देखने को मिला था। इससे उनके हौसले और बुलंद हुए और उन्होंने पांचवें अटेम्प्ट के लिए पढ़ाई शुरू की। 11 साल की उम्र में हुई शादी के बाद रामलाल 20 साल की उम्र में पिता बन गए। पति से पिता बनने की जिम्मेदारी के साथ उन्होंने अपने लक्ष्य को पीछे नहीं छोड़ा और पढ़ाई जारी रखी। 6 महीने की बेटी को छोड़ वह नीट की तैयारी के लिए वापस कोटा गए।
2023 में रामलाल ने पांचवी बार नीट की परीक्षा दी। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ बिना हार मानें उन्होंने हार नहीं मानी और पांचवें प्रयास में नीट की परीक्षा पास की और डॉक्टर बनने के अपने सपने की तरफ कदम बढ़ाया।
रामलाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को मोबाइल फोन से दूर रखा। ताकि उनका मन इधर-उधर न जाए, इसलिए उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई का सहारा भी नहीं लिया। माता-पिता और पत्नी के बात करने के लिए वह कभी-कभी दोस्त के कीपैड वाले मोबाइल का इस्तेमाल करते थे।