हरियाणा के रेवाड़ी, जिले के बावल क्षेत्र में रहने वाली जिया आज सेना में अफसर बन गई है। लेकिन इसके लिए केवल उन्होंने ही मेहनत नहीं की है, बल्कि उनके माता-पिता का भी संघर्ष रहा है। जिया के पिता एक ऑटो चलाते थे, जिसे 5 लोगों का परिवार चलता था। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने जिया, पारुल और हिमांशु की पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी और उनकी एक बेटी ने उनका सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
जिया ने बावल क्षेत्र में रहने वाली जिया ने गांव के सुलखा में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान ही जिया ने ठान लिया था कि वह यूपीएससी की नेशनल डिफेंस एकेडमी यानी NDA परीक्षा की तैयारी करेंगी और सेना में जाएंगी।
सेना में अधिकारी बनने के अपने इस सपने को पूरा करने के लिए जिया ने 15-15 घंटे की पढ़ाई की है। वह सुबह-शाम एनडीए परीक्षा की तैयारी में लगी रहती। इतना ही नहीं उन्होंने परीक्षा के बारे में और इसकी तैयारी में सहायता के लिए कुछ समय के लिए गुरुग्राम में एनडीए की कोचिंग भी ली।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा की तैयारी के दौरान एक समय ऐसा भी आया, जिसमें जिया की तबियत बिगड़ गई। वह कुछ नहीं, बल्कि कई महीनों तक बीमार रही। लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी।
जिया ने यूपीएससी एनडीए एग्जाम 2024 में पूरे जिले में पहला स्थान प्राप्त किया, जिससे उनके परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटी की कामयाबी देख परिवार के लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
एनडीए परीक्षा पास करने और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जिया अपने गांव लेफ्टिनेंट बनकर लौटी। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे गांव में जश्न का माहौल था। उनके स्वागत के लिए गांव के स्कूल में एक समारोह का भी आयोजन किया गया था।
एक इंटरव्यू में जिया ने बात करते हुए अपनी सफलता और सेना में अधिकारी बनने का पूरा श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता के सपोर्ट के बिना वह यहां कभी नहीं पहुंच पाती।