जब दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों की बात होती है, तो सबसे पहले माउंट एवरेस्ट का नाम आता है। वहीं भारत का सबसे ऊंचा पर्वत कंचनजंघा है। दोनों ही हिमालय पर्वत श्रृंखला का हिस्सा हैं और अपनी खूबसूरती व कठिन चढ़ाई के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। हालांकि, ऊंचाई के मामले में माउंट एवरेस्ट कंचनजंघा से आगे है। (Image - ChatGPT)
माउंट एवरेस्ट की आधिकारिक ऊंचाई 8,848.86 मीटर (29,031.7 फीट) है। यह पर्वत नेपाल और चीन (तिब्बत) की सीमा पर स्थित है। इसे दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है और हर साल हजारों पर्वतारोही इसकी चोटी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
कंचनजंघा की ऊंचाई 8,586 मीटर (28,169 फीट) है। यह भारत के सिक्किम और नेपाल की सीमा पर स्थित है। कंचनजंघा दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है और भारत का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है।
माउंट एवरेस्ट दुनिया भर के पर्वतारोहियों का सबसे बड़ा सपना माना जाता है। हर साल विभिन्न देशों के हजारों लोग इसकी चढ़ाई के लिए नेपाल पहुंचते हैं। हालांकि, यहां मौसम खतरनाक रहता है, जिससे इस पर्वत की चढ़ाई बेहद कठिन हो जाती है। यहां ऑक्सीजन की इतनी कमी हो जाती है कि अस्वस्थ व्यक्ति ऐसा करने की सोच भी नहीं सकता है।
वहीं कंचनजंघा को स्थानीय लोग पवित्र पर्वत मानते हैं। इसी वजह से कई पर्वतारोही इसकी चोटी से कुछ मीटर पहले ही रुक जाते हैं और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हैं। कंचनजंघा का क्षेत्र जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।
माउंट एवरेस्ट का नाम ब्रिटिश सर्वेक्षक सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया था। नेपाल में इसे "सागरमाथा" और तिब्बत में "चोमोलुंगमा" के नाम से जाना जाता है। वहीं कंचनजंघा का अर्थ "बर्फ के पांच खजाने" माना जाता है, क्योंकि इसकी पांच प्रमुख चोटियां हैं, जो हमेशा बर्फ से ढकी रहती हैं।