यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए कई उम्मीदवार अपने शानदार और स्थिर करियर तक छोड़ देते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है अपाला मिश्रा की, जो पहले एक प्रैक्टिसिंग डॉक्टर थीं।
उन्होंने सिविल सेवा में जाने के अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी मेडिकल प्रैक्टिस छोड़ दी। कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि टॉप रैंक हासिल कर एक नया इतिहास भी रच दिया। उनके पिता कर्नल और मां प्रोफेसर हैं
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की रहने वाली अपाला मिश्रा को देश सेवा विरासत में मिली है। उनके पिता अमिताभ मिश्रा सेना में कर्नल रह चुके हैं। वहीं, उनके भाई अभिलेख आर्मी में मेजर रैंक पर तैनात हैं। उनकी मां प्रोफेसर हैं।
अपाला मिश्रा ने 10वीं की परीक्षा देहरादून से पास की है। वहीं, 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली के रोहिणी में हुई है। इसके बाद उन्होंने आर्मी कॉलेज से बीडीएस की डिग्री हासिल की और डेंटिस्ट बन गईं।
डॉक्टर प्रैक्टिस के दौरान अपाला मिश्रा का मन UPSC में जाने का हुआ। उन्होंने डेंटल प्रैक्टिस के साथ ही UPSC की तैयारी शुरू कर दी। उन्हें शुरुआत के दो प्रयास में असफलता हासिल हुई। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखा।
यूपीएससी सिविल सर्विस 2020 की परीक्षा में अपाला मिश्रा को ऑल इंडिया रैंक 9 प्राप्त हुआ। उन्हें यूपीएससी पर्सनल इंटरव्यू में रिकॉर्ड मार्क्स प्राप्त हुए थे। उन्हें 275 में से सबसे ज्यादा 215 अंक प्राप्त हुए।
अपाला मिश्रा ने UPSC शानदार रैंक से क्रैक करने के बाद भी IAS की जगह IFS यानी इंडियन फॉरेन सर्विस को चुना। इसके पीछे की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि वो शुरु से अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती थीं!