हम आपको ऐसे 5 अधिकारियों के बताने जा रहे हैं, जिनके लिए एक वक्त पर स्कूल में पास होना तक मुश्किल हो गया था। मगर असफलता पर रोने की बजाय इन्होंने हार नहीं मानी। मेहनत, आत्मविश्वास और सही रणनीति की बदौलत उन्होंने देश की सबसे मुश्किल परीक्षा UPSC को पास कर दिखाया।
हर साल लाखों अभ्यर्थी यूपीएससी की परीक्षा देते हैं। मगर कई बार छात्रों के मन में ये सवाल आता है कि क्या सिर्फ टॉपर्स ही यूपीएससी पास कर सकते हैं? स्कूल में हमेशा अव्वल रहे छात्र ही सिविल सर्विस परीक्षा पास कर सकते हैं। लेकिन ये 5 अधिकारी ऐसे हैं, जो स्कूल में कभी ना कभी फेल हुए हैं मगर इन्होंने देश की सबसे मुश्किल परीक्षा पास कर ली।
मनोज कुमार शर्मा 12वीं में हिंदी को छोड़कर सभी विषयों में फेल हुए थे। गरीबी के चलते उन्हें टेंपो तक चलाना पड़ा था। फुटपाथ पर सोना और लाइब्रेरी में काम करना पड़ा था। कठिन हालातों के बावजूद मनोज शर्मा ने कभी हार नहीं मानी और दिल्ली की एक लाइब्रेरी में काम करते हुए यूपीएससी परीक्षा की अपनी तैयारी जारी रखी। चौथी कोशिश में मनोज कुमार शर्मा ने साल 2005 में ऑल इंडिया रैंक 121 हासिल की और वे आईपीएस अधिकारी बने।
आईएएस अधिकारी अंजू शर्मा ने 10वीं की प्रो बोर्ड एग्जाम में कैमिस्ट्री और 12वीं के इकनॉमिक्स सब्जेक्ट में फेल हो गई थीं। इसके बाद वे काफी तनाव में भी रही थीं। मगर उन्होंने गलतियों से सीखा और परीक्षा के तरीके को बदल दिया। इसके बाद उन्होंने बीएससी और एमबीए में गोल्ड मेडल हासिल किया और फिर सिर्फ 22 साल की उम्र में ही यूपीएससी की परीक्षा पास की। साल 1991 में वे गुजरात कैडर की आईएएस अधिकारी बनीं।
आकाश कुल्हारी राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं। परीक्षा में कम अंक आने की वजह से उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। मगर इसके बाद मेहनत के दम पर उन्होंने 12वीं में 85 प्रतिशत नंबर हासिल किए। इसके बाद पढ़ाई के साथ उन्होंने एमफिल करते हुए यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत कर वे आईपीएस अधिकारी बने।
बिहार के अवनीश शरण सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहते हैं। उन्होंने स्कूल में कभी भी टॉप नहीं किया। 10वें में उनके सिर्फ 44 प्रतिशत नंबर आए थे। शुरुआती दौर में सिविल सेवा परीक्षा में कई बार उन्हें असफलता मिली। मगर फिर उन्होंने एकदम फोकस्ड होकर मेहनत की और फिर वे अपने प्रयास में सफल भी हो गए। साल 2009 में उन्हें ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल हुई।
रुक्मणि रियार गुरुदासपुर पंजाब की रहने वाली हैं। जब उन्हें सेक्रेड हार्ट स्कूल डलहौजी में बोर्डिंग स्कूल भेजा गया तो वे 6वीं क्लास में फेल हो गई थीं। मगर उन्होंने इस असफलता से हार नहीं मानी और लगातार मेहनत की। उन्होंने अमृतसर से सोशल साइंस में ग्रेजुएशन किया और फिर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोश साइंसेज मुंबई से मास्टर डिग्री हासिल की। कड़ी मेहनत के बल पर साल 2011 में उन्हें ऑल इंडिया 2 रैंक मिली।