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'छात्रों को शत्रु के रूप में देख रही मोदी सरकार', सोनिया गांधी ने सरकार पर उठाए सवाल

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया, 'मोदी सरकार ने उनकी बहादुरी का जवाब कायरता और निर्मम क्रूरता से दिया है, उनके साथ भविष्य के कर्णधारों की तरह नहीं, बल्कि देश के शत्रुओं की तरह व्यवहार किया है।’ उन्होंने 20 जुलाई की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 'शर्मनाक दिन’था।

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Photo : PTI
कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी।
Edited by: Alok Rao
Updated Jul 24, 2026, 09:35 IST
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Sonia Gandhi: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने शुक्रवार को आरोप लगाया है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था के 'पतन’के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन तथा जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों को नरेन्द्र मोदी सरकार 'देश के शत्रु’ की तरह पेश कर रही है और उनकी आवाज दबाने के लिए दमनकारी ताकत का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने अंग्रेजी दैनिक 'द हिंदू’ के लिए लिखे लेख में यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगें सीधी और स्पष्ट हैं कि भारत सरकार की जवाबदेही तय हो और शिक्षा में सुधार किया जाए।

सरकार पर क्रूरता अपनाने का आरोप लगाया

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया, 'मोदी सरकार ने उनकी बहादुरी का जवाब कायरता और निर्मम क्रूरता से दिया है, उनके साथ भविष्य के कर्णधारों की तरह नहीं, बल्कि देश के शत्रुओं की तरह व्यवहार किया है।’ उन्होंने 20 जुलाई की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 'शर्मनाक दिन’था, जब दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए 'बिना किसी उकसावे के हिंसा’का सहारा लिया। सोनिया गांधी ने लिखा, 'इसने हमारी सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है।'

संवाद नहीं हिंसा पर सरकार का जोर-सोनिया

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार 'नियमित रूप से संवाद के बजाय हिंसा का इस्तेमाल करती है’और किसानों से लेकर कार्यकर्ताओं तक, असहमति को दबाने की एक स्पष्ट प्रवृत्ति दिखायी देती है। सोनिया गांधी ने लिखा, हमारे भविष्य के डॉक्टरों और इंजीनियरों, शिक्षकों और लोक सेवकों, उद्यमियों और राष्ट्र निर्माताओं तक पहुंचने और उन्हें समझने के बजाय, सरकार ने उनके खिलाफ राज्य की दमनकारी शक्ति का इस्तेमाल किया।’ उन्होंने कहा कि इसे 'न तो माफ किया जा सकता है और न ही भुलाया जा सकता है।’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार ने 'हर असहमति को राष्ट्र-विरोधी बताने वाले पुराने टूलकिट’का इस्तेमाल किया है।

शिक्षा व्यवस्था से जुड़े तीन 'मूलभूत मुद्दों’को रेखांकित किया

उन्होंने लिखा, 'मोदी सरकार ने छात्रों के आंदोलन को कलंकित करने के लिए अपने पुराने टूलकिट को फिर से इस्तेमाल किया है और आरोप लगाने तथा साजिशें गढ़ने के लिए अपने हथकंडों के भंडार में गहराई तक उतर गई है, जबकि उसे अपनी उन नीतियों पर आत्ममंथन करना चाहिए था जिन्होंने इन विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया है।’ कांग्रेस की शीर्ष नेता ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े तीन 'मूलभूत मुद्दों’को रेखांकित किया। सोनिया गांधी ने दावा किया कि स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा पर कुल बजट में खर्च का अनुपात क्रमश: 50 प्रतिशत और 33 प्रतिशत कम हुआ है।

सोनिया का दावा-UGC के अनुदान में कटौती की

उन्होंने सवाल किया, 'क्या कोई इस तरह के बेतुके तरीके से पीछे हटने में कोई तुक देख सकता है?’ उन्होंने पिछले 12 वर्षों में करीब एक लाख सरकारी स्कूल बंद किए जाने और 43,000 निजी स्कूल खोले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन निजी स्कूलों में से बड़ी संख्या में स्कूल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े संगठनों द्वारा संचालित किए जाते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की और उन्हें ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने के लिए मजबूर किया गया।

सोनिया गांधी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सस्ती सार्वजनिक शिक्षा की कमी के कारण भारतीय परिवारों को अपने बच्चों की शिक्षा पर अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है।

NTA की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) की कोचिंग पर परिवारों द्वारा खर्च की जाने वाली कुल राशि उतनी है, जितना मोदी सरकार सार्वजनिक शिक्षा पर कुल मिलाकर निवेश करती है। उन्होंने लिखा, 'निजी शिक्षा हासिल करने की लागत लाखों प्रतिभाशाली छात्रों को हतोत्साहित करती है, जो साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन उनमें अपार क्षमता होती है।’सोनिया गांधी ने कहा कि इन खर्चों से छात्रों पर परिवारों की उम्मीदों का 'कुचल देने वाला बोझ’भी पड़ता है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने परीक्षा प्रणाली में 'केंद्रीकरण, निजीकरण और राजनीतिकरण’ का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

(एजेंसी इनपुट)

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