मुश्किल हालातों से भी नहीं हारी हिम्मत, दुख को ताकत बनाकर IAS बनीं अंकिता चौधरी

कहते हैं अगर हौसले बुलंद हों तो मंजिल को पाने से कोई नहीं रोक सकता। इस बात को सच साबित कर दिखाया है अंकिता चौधरी ने। जिनकी जिंदगी में एक दफा ऐसा मोड़ आया कि उसने अंकिता की हिम्मत को तोड़ कर रख दिया। मगर बजाय गिरने के वे उठीं और फिर ऐसा मुकाम पाया कि जिंदगी में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

Authored by: कुसुम भट्टUpdated Oct 21 2025, 11:21 IST
कहां से हुई पढ़ाई-लिखाईImage Credit : Twitter01 / 07

कहां से हुई पढ़ाई-लिखाई

अंकिता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई में हमेशा से अंकिता अच्छी थीं और वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती थीं। जैसे ही ग्रेजुएशन पूरा हुआ, अंकिता ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

आईएएस बनने का था सपनाImage Credit : Twitter02 / 07

आईएएस बनने का था सपना

अंकिता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई में हमेशा से अंकिता अच्छी थीं और वे आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती थीं। जैसे ही ग्रेजुएशन पूरा हुआ, अंकिता ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

2017 में टूटा दुखों का पहाड़Image Credit : Twitter03 / 07

2017 में टूटा दुखों का पहाड़

साल 2017 का समय था, जब अंकिता दिन-रात यूपीएससी की तैयारी में लगी हुई थीं। इसी साल वे अपना पहला अटेंप्ट देने जा रही थीं मगर फिर जिंदगी में ऐसा मोड़ आया जिसकी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी। अंकिता की मां का निधन हो गया। अंकिता की सबसे बड़ी ताकत ने ही उनका साथ छोड़ दिया।

मां के निधन ने झकझोराImage Credit : Twitter04 / 07

मां के निधन ने झकझोरा

अंकिता उस साल परीक्षा में असफल हुईं जिसका उन्हें बेहद दुख था। मगर मां के निधन ने मानो उन्हें अंदर से झकझोर कर रख दिया। इस दौरान अंकिता के पिता उनकी हिम्मत बनकर साथ खड़े रहे। पिता हर पल याद दिलाते रहे कि कैसे उनकी मां चाहती थीं कि वे एक आईएएस अफसर बनें।

साल 2018 में क्रैक किया यूपीएससीImage Credit : IStock05 / 07

साल 2018 में क्रैक किया यूपीएससी

पिता ने कहा कि अंकिता मां का ये सपना सिर्फ तुम्हारे हाथों पूरा होगा। और बस... फिर अंकिता के लिए ये शब्द मानो कोई जादुई ताकत बन गए। अंकिता सब भूलकर बस अपनी तैयारी में लग गईं। अंकिता ने एक साल बाद 2018 में फिर से यूपीएससी का एग्जाम दिया और इस बार अंकिता न सिर्फ पास हुईं बल्कि ऑल इंडिया 18 रैंक भी अंकिता ने हासिल की।

युवाओं के लिए बनीं मिसालImage Credit : IStock06 / 07

युवाओं के लिए बनीं मिसाल

अंकिता की इस जीत ने न सिर्फ उनके परिवार को दोबारा खड़ा करने में मदद की बल्कि ये उन तमाम युवाओं के लिए मिसाल बन गई, जो विषम परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं। अंकिता की सक्सेस ऐसे तमाम युवाओं के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है।

युवाओं के लिए मिसाल हैं अंकिताImage Credit : IStock07 / 07

युवाओं के लिए मिसाल हैं अंकिता

अंकिता का कहना है कि असफलता डर नहीं बल्कि सबक देती है। औऱ जब आप सबक सीखते हैं तो सफलता खुद ब खुद आपके पीछे चलकर आती है। आज अंकिता एक आईएएस अफसर हैं और लोगों की जिंदगियां बदल रही हैं। अंकिता गुरुग्राम नगर निगम में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात हैं।

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