ताजा प्रशासनिक फेरबदल में हाल ही में रिया डाबी को मुख्यमंत्री कार्यालय में एक अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेषाधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
ओएसडी का फुल फॉर्म होता है- Officer on Special Duty. यानी विशेष सेवा में तैनात अधिकारी। इस पद पर अपॉइंट किए जाने का मतलब है कि मुख्यमंत्री के करीब रहकर उनकी फाइलों को देखना, अहम नीतिगत फैसलों में भागीदारी का होना और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बैठाना। यानी कि अब रिया डाबी शीर्ष नेतृत्व में पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा होंगी।
ओएसडी का काम सरकारी नीतियों और योजनाओं पर मुख्यमंत्री को इनपुट देना होता है। मीडिया, सोशल मीडिया और जनसंपर्क की रणनीति ये अधिकारी बनाता है। सीएम को सलाह देने का भी काम होता है। ओएसडी IAS, IPS या फिर राज्य सचिवालय के कर्मचारी बनते हैं।
कोई मंत्री/CM अपने साथ लंबे समय से काम कर रहे अधिकारी को OSD के रूप में नियुक्त कर सकते हैं। कई बार मीडिया एक्सपर्ट्स, लॉ एक्सपर्ट या फिर पॉलिसी एनालिस्ट को भी OSD बनाया जाता है। ध्यान रहे कि ओएसडी बनने के लिए कोई परीक्षा नहीं होती है।
ओएसडी पहले से ही सरकारी अधिकारी होते हैं- जैसे कि- IAS, IPS, IRS और PCS या फिर अन्य ग्रुप ए या बी अधिकारी। ये अधिकारी डेपुटेशन पर आते हैं।
CM की OSD बनने के बावजूद रिया डाबी की सैलरी में कोई अलग बदलाव नहीं होगा। उन्हें IAS अधिकारी के तौर पर तय वेतन ही मिलेगा। 7वें वेतन आयोग के अनुसार, एक आईएएस (IAS) अधिकारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹56,100 प्रति माह होती है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) मिलकर शुरुआती कुल वेतन लगभग ₹80,000 से ₹90,000 तक हो सकता है।
बता दें कि OSD भी दो तरह के होते हैं। एक तो प्रशासनिक ओएसडी होते हैं जो कि आईएएस, आईपीएस अधिकारियों में से ही किसी को बनाया जाता है। ये नौकरशाही के जरिये नीति और प्रशासनिक काम संभालते हैं। वहीं दूसरे मुख्यमंत्री के निजी कामों और राजनीतिक मामलों को देखते हैं। ये भरोसेमंद सहयोगी या फिर पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं।