40 की उम्र में दो बेटियों की मां बनीं IAS, 7वें अटेम्प्ट में रच दिया इतिहास

IAS Nisa Unnirajan Inspirational Story: कड़ी मेहनत, संघर्ष और दृढ निश्चय से व्यक्ति बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है, फिर कितनी भी बाधाएं क्यों ना आ जाएं आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। कुछ ऐसी ही कहानी है 40 वर्ष की केरल की रहने वाली निसा उन्नीराजन की। जिन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर आपके हौसले बुलंद हैं तो उम्र, विकलांगता या अन्य बाधाएं आपके सपने को पूरा होने से नहीं रोक सकती हैं। निसा 2024 में यूपीएससी में 1000वीं रैंक लाकर आईएएस बनी थी।

Authored by: आदित्य सिंहUpdated Sep 21 2025, 10:44 IST
​इस उम्र में की यूपीएससी की तैयारीImage Credit : Twitter/Istock01 / 05

​इस उम्र में की यूपीएससी की तैयारी

निसा ने 35 वर्ष की उम्र में यूपीएससी की तैयारी शुरू की। इस उम्र में पहुंचने तक अक्सर लोग सरकारी नौकरी की तैयारी करना छोड़ देते हैं। लेकिन निसा ने हार नहीं मानी और 2024 में 7वें अटेम्प्ट में यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर इतिहास रच दिया।

​दो बेटियों की देखभाल​Image Credit : Twitter/Istock02 / 05

​दो बेटियों की देखभाल​

बता दें निसा की दो बेटियां हैं। बड़ी हेटी की उम्र 11 साल और छोटी बेटी की उम्र 7 साल है। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की देखभाल करते हुए यूपीएससी की तैयारी की।

​माता पिता और पति ने किया सहयोग​Image Credit : Twitter/Istock03 / 05

​माता पिता और पति ने किया सहयोग​

एक इंटरव्यू के दौरान निसा ने बताया था कि उन्होंने अपने पति अरुण और अपने बुजुर्ग माता पिता के सहयोग से ये सफलता हासिल की है। बता दें उनके माता पिता दोनों रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी हैं।

​लगातार 6 बार मिली असफलता​Image Credit : Twitter/Istock04 / 05

​लगातार 6 बार मिली असफलता​

निसा शुरू के 6 प्रयासों में यूपीएससी परीक्षा पास नहीं कर पाई, उन्हें सुनने की समस्या भी है। हालांकि उन्होंने कभी इसे अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया। लगातार असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

​यहां से मिली प्रेरणा​Image Credit : Twitter/Istock05 / 05

​यहां से मिली प्रेरणा​

निसा ने तिरुवनंतपुरम के एक निजी कोचिंग सेंटर से सिविल सेवा की तैयारी की। साथ ही उन्होंने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि उन्हें कोट्टायम के उप कलेक्टर रंजीत से प्रेरणा मिली, जिनकी खुद सुनने की क्षमता नहीं है। निसा की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत और संघर्ष से व्यक्ति बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है, फिर चाहे कितनी बाधाएं क्यों ना आ जाएं।

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