पिता के सपने के लिए छोड़ी मेडिकल की पढ़ाई, पहले IPS और फिर IAS बन रचा इतिहास

IAS Mudra gairola Inspirational story: संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस बनने वाले तमाम युवाओं की कहानियां प्रेरणा देने वाली होती हैं। आज हम आपको एक ऐसी आईएएस की कहानी बताने वाले हैं जिसने पिता का सपना पूरा करने के लिए दो बार यूपीएससी क्रैक कर डाली। मेडिकल में गोल्ड मेडलिस्ट होने के बावजूद उन्होंने पिता की खातिर सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। ये कहानी है उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग की रहने वाली मुद्रा गैरोला की।

Authored by: कुलदीप राघवUpdated Sep 24 2025, 10:25 IST
आईएएस मुद्रा गैरोला Image Credit : Instagram01 / 07

आईएएस मुद्रा गैरोला

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस बनने वाले तमाम युवाओं की कहानियां प्रेरणा देने वाली होती हैं। आज हम आपको एक ऐसी आईएएस की कहानी बताने वाले हैं जिसने पिता का सपना पूरा करने के लिए दो बार यूपीएससी क्रैक कर डाली।

उत्तराखंड से ताल्लुकImage Credit : Instagram02 / 07

उत्तराखंड से ताल्लुक

मेडिकल में गोल्ड मेडलिस्ट होने के बावजूद उन्होंने पिता की खातिर सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। ये कहानी है उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग की रहने वाली मुद्रा गैरोला की।

तीन बार मिली असफलताImage Credit : Instagram03 / 07

तीन बार मिली असफलता

मुद्रा ने साल 2018 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम दिया, जिसमें वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंचीं। 2019 में फिर से यूपीएससी इंटरव्यू दिया। इस बार भी फाइनल सेलेक्शन नहीं हुआ। 2020 में वह मेन्स एग्जाम क्रैक नहीं कर सकीं।

चौथे प्रयास में आईपीएसImage Credit : Instagram04 / 07

चौथे प्रयास में आईपीएस

मुद्रा ने साल 2021 में एक बार फिर से यूपीएससी एग्जाम दिया और 165वीं रैंक के साथ यूपीएससी क्लीयर किया। इसके बाद वह आईपीएस बनीं।

पांचवें प्रयास में आईएएसImage Credit : Instagram05 / 07

पांचवें प्रयास में आईएएस

साल 2022 में वह फिर से सिविल सेवा परीक्षा में बैठीं और 53वीं रैंक के साथ यूपीएससी क्लियर करके वह आईएएस बनने में कामयाब रहीं।

​छोड़ी मेडिकल की पढ़ाईImage Credit : Instagram06 / 07

​छोड़ी मेडिकल की पढ़ाई

उनके 10वीं में 96% और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 97% मार्क्स थे। मुद्रा ने 12वीं पास करके मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में बीडीएस यानी डेंटल में दाखिला लिया और गोल्ड मेडल हासिल किया। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह दिल्ली आ गईं और एमडीएस में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की।

बेटी ने पूरा किया पिता का सपना Image Credit : Instagram07 / 07

बेटी ने पूरा किया पिता का सपना

मुद्रा गैरोला के पिता अरुण गैरोला ने साल 1973 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी थी लेकिन वह इंटरव्यू राउंड में सफल नहीं हो सके। इसके बाद उनके इस अधूरे सपने को 50 साल बाद उनकी बेटी ने पूरा किया।

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