डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों छात्र हर साल MBBS (Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery) कोर्स में दाखिला लेते हैं। कई बार छात्रों को कोर्स पूरा करने के लिए जरूरत से ज्यादा समय लग जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे बीच में पढ़ाई छूट जाना या किसी अन्य कारण से देरी हो जाना। ऐसे में छात्रोे के कितने अटेम्प्ट मिलते हैं, आइए आसान भाषा में पूरी जानकारी समझते हैं।
भारत में MBBS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) की कुल अवधि ठीक 5.5 वर्ष है। यह समय-सीमा नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा मान्यता प्राप्त सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए मानक है।
भारत में MBBS कोर्स की अवधि को दो हिस्से में बाटा गया है: 4.5 साल की पढ़ाई (Academic Course) और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप (Compulsory Rotatory Internship)
भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई अलग-अलग चरणों में होती है, पहला — प्रोफेशनल (First Professional) जो कि लगभग 1 साल का है, इसमें मुख्य विषय एनाटॉमी (Anatomy), फिजियोलॉजी (Physiology), बायोकेमिस्ट्री (Biochemistry) है।
दूसरा प्रोफेशनल (Second Professional) जो कि करीब 1.5 साल का होता है, इसमें मुख्य विषय पैथोलॉजी (Pathology), फार्माकोलॉजी (Pharmacology),माइक्रोबायोलॉजी (Microbiology) है।
तीसरा प्रोफेशनल (Final Phase) जो कि करीब 2 साल का होता है, इसमें मुख्य विषय मेडिसिन (Medicine), सर्जरी (Surgery), गायनेकोलॉजी (Gynecology)पीडियाट्रिक्स (Pediatrics), और ऑर्थोपेडिक्स (Orthopedics) आते हैं।
इसके बाद छात्रों को अस्पताल में 1 साल की इंटर्नशिप करनी होती है। इंटर्नशिप के दौरान मेडिकल छात्र अस्पताल में मरीजों का इलाज सीखते हैं। यह पूरी तरह प्रैक्टिकल ट्रेनिंग होती है। इस दौरान मेडिसिन, सर्जरी, इमरजेंसी, बाल रोग, स्त्री रोग, कम्युनिटी हेल्थ की ट्रेनिंग पूरी करनी होती है। इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही MBBS डिग्री पूरी मानी जाती है।
भारत में MBBS की अधिकतम समय सीमा 9 साल है। यानी अगर कोई छात्र किसी कारण से फेल हो जाता है, ब्रेक लेता है या पढ़ाई में देरी होती है, तब भी उसे 9 साल के अंदर पूरा कोर्स और इंटर्नशिप खत्म करनी होती है। (image - canva)