आज दिल्ली-एनसीआर ही क्या, पूरे देश में मॉल की भरमार है। बड़ी संख्या में लोग इन मॉलों में शॉपिंग के लिए जाते हैं। कई बार लोग सिर्फ विंडो शॉपिंग करके लौट आते हैं। लेकिन मॉल संस्कृति आज के आधुनिक लाइफस्टाइल में बहुत अच्छे से घुल-मिल गई है।
मॉल में शॉपिंग का मजा तो है ही, साथ ही एक ही जगह पर कई तरह का भोजन भी मिल जाता है। आमतौर पर मॉल के ऊपरी माले पर फूड कोर्ट होता है, जिसमें खाने-पीने की तमाम दुकानें होती हैं। यहां जाकर लोग अलग-अलग तरह के फूड का लुत्फ उठाते हैं।
दिल्ली या कहें उत्तर भारत का पहला मॉल आज से 25 साल पहले 1999 में दक्षिण दिल्ली में बना था। इस मॉल का नाम अंसल प्लाजा है, जो साउथ एक्स के पास खेलगांव रोड पर एंड्रूज गंज में है। उस समय यह मॉल आकर्षण का केंद्र था और यहां शॉपिंग शान की बात मानी जाती थी।
अंसल प्लाज गोलाकार में बना है और यहां पर एक एंफी थिएटर भी बनाया गया है, जिसमें अक्सर प्ले और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। इस मॉल में आज भी देश और दुनिया के बड़े-बड़े ब्रांड मौजूद हैं। दिल्ली में शॉपर्स स्टॉप की सबसे पुरानी आउटलेट में से एक यहां पर है।
अंसल प्लाजा आज भी दिल्ली का पहला प्यार है, जिस पर दिल्ली के दिलवालों ने जमकर प्यार लुटाया। एक समय यहां पर भारी भीड़ हुआ करती थी। यह मॉल युवाओं के हैंगआउट के लिए फेवरिट जगह थी। हालांकि, अब यहां उतनी भीड़ नहीं होती, लेकिन सुकून से शॉपिंग का लुत्फ ले सकते हैं।
अंसल प्लाजा में 178 हजार स्क्वायर फीट ग्रॉस लीजेबल एरिया है। (दिल्ली के सबसे महंगे बंगले) मॉल में एक समय में करीब 1000 कार पार्क हो सकती हैं। इस मॉल की सफलता ने देश में मॉल संस्कृति को जन्म दिया।
आज भले ही बड़े-बड़े और आधुनिक मॉल खुल गए हों। लेकिन अंसल प्लाजा की जो नॉस्टाल्जिक वैल्यू है, उसका कोई मुकाबला नहीं है। जिन लोगों ने यहां 25 साल पहले शॉपिंग की है, वह आज भी उस अनुभव को याद करते हैं।