बिहार से बंगाल तक सफर आसान बनाने के लिए 650 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल बनाने की कवायत तेज हो गई है। जी, हां हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेसवे के रूट मैप को मंजूरी मिल चुकी है। यह मार्ग बिहार में 408 किलोमीटर की दूरी कवर करेगा। एक्सप्रेसवे की अधिकतम स्पीड लिमिट 120 किलोमीटर प्रति घंटे तय की गई है। परियोजना के तहत 27 मेजर ब्रिज, 201 माइनर ब्रिज, 51 इंटरचेंज के अलावा बेगूसराय जिले के बिरपुर गांव के पास गंगा नदी पर लगभग 4.5 किमी लंबा पुल भी प्रस्तावित है। इसे बनाने के लिए 39,600 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेसवे के निर्माण की रूट मैप को हरी झंडी मिल चुकी है। यह पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 650 किलोमीटर की दूरी कवर करेगा। ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे झारखंड राज्य के दो जिलों देवघर में 65 किलोमीटर और जामताड़ा में 50 किमी दूरी का शामिल करते हुए हल्दिया बंदरगाह (Haldia Port) को कनेक्ट करेगा।
हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेसवे 6 लेन तक प्रस्तावित किया गया है। यह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में रक्सौल और उधर पश्चिम बंगाल में हल्दिया तक बनेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार इसके चालू होने से देवघर और पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय केवल तीन घंटे में पूरा होगा।
बिहार में 408 किलोमीटर तक बनने वाले इस एक्सप्रेसवे के लिए 39,600 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। यह एक्सप्रेसवे पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई और बांका से गुजरेगा। एक्सप्रेसवे रक्सौल से शुरू होगा और पूर्वी चंपारण, शिवहर, समस्तीपुर, बेगूसराय से होकर आगे बढ़ेगा। 60 मीटर हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए 4886 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है, जिससे स्थानीय किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। किसानों को सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
फिर, सूर्यागढा से मलयपुर, चिरयंदी, बांका के कटोरिया, देवघर के मोहनपुर-नागपुर, घोरमारा, सोनारायताढ़ी तक नए पुल के जरिए गंगा नदी (Ganga River) को पार करेगा। फिर आगे जामताड़ा में पालोजोरी, कुंडलित, बोलपुर, आरामबाग, राजहट्टी, पूर्वी मिदनापुर और अंत में हल्दिया बंदरगाह तक जाएगा। पश्चिम बंगाल के आसमसोल-दुर्गापुर को कवर करेगा।
भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत बनाए जा रहे एक्सप्रेसवे एक्सेस कंट्रोल (Access Control) हैं। एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे उन मार्गों को कहा जाता है, जो आमतौर पर हाईस्पीड वाहनों के लिए तैयार किए जाते हैं। इन खास सड़क मार्गों पर धीमी रफ्तार में चलने वाले वाहनों को अनुमति नहीं होती है। ये दोनों ओर से घिर होते हैं, ताकि बाहर से कोई जानवर इत्यादि मार्ग पर न आ सकें।
हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेसवे की कुल परियोजना के लिए एनएचएआई 60,000 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है, लेकिन अब यह राशि और बढ़ेगी। इस परियोजना से बिहार और झारखंड सीधे बंदरगाह से कनेक्ट होंगे। यह सड़क मार्ग खदानों और खनिजों के परविहन के लिए काफी हद तक फायदेमंद साबित होगी। साथ ही हल्दिया पोर्ट से साथ कनेक्टिविटी बढ़ने से बिहार और झारखंड दोनों को सयुंक्त रूप से लाभ होने वाला है। कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को व्यापक तौर पर बढ़ावा मिलेगा। साथ इसके समानांतर लिंक रोड हाईवे और नए पुल बनने से अन्य शहरों के लिए यातायात काफी सुगम होगा।