सोनम वांगचुक करीबन एक महीने से दिनों NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर खबरों में हैं। उन्होंने शिक्षा में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की। केंद्र सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन आज 24 जुलाई खत्म कर दिया। वांगचुक शिक्षा सुधारक, इंजीनियर और इनोवेटर के रूप में भी जाने जाते हैं। आइये जानें सोनम वांगचुक के पास कौन सी डिग्री है
सोनम वांगचुक का जन्म लद्दाख के अल्ची गांव में हुआ था। उनके गांव के आसपास कोई स्कूल नहीं था। ऐसे में उनकी मां ने उन्हें नौ साल की उम्र तक घर पर ही उनकी मातृभाषा में पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणित सिखाया।
इसके बाद जब उनका दाखिला श्रीनगर के एक स्कूल में हुआ, तो वहां पढ़ाई ऐसी भाषा में होती थी जिसे वह ठीक से समझ नहीं पाते थे। वांगचुक ने बाद में बताया कि यह उनके बचपन का सबसे कठिन दौर था। भाषा की समस्या के कारण उनकी चुप्पी को कई लोग उनकी कम समझ या कम बुद्धिमानी से जोड़कर देखते थे।
इन शुरुआती मुश्किलों के बावजूद वांगचुक ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने 1987 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (BTech) की डिग्री हासिल की। उस समय संस्थान को रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से जाना जाता था।
ग्रेजुएशन के बाद वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की दिशा में काम करने का फैसला किया। उन्होंने 1988 में 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की सह-स्थापना की। यह संस्था छात्रों पर केंद्रित और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करती है।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के साथ-साथ सोनम वांगचुक अपने इनोवेशन के लिए भी जाने जाते हैं। उनका सबसे चर्चित आविष्कार 'आइस स्तूप' है। इसके जरिए सर्दियों के दौरान पानी को आर्टिफिशियल ग्लेशियर के रूप में जमा किया जाता है, जिसे वसंत के मौसम में पिघलने पर खेती के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह तकनीक खास तौर पर लद्दाख जैसे पानी की कमी वाले इलाकों में किसानों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है और इसे दुनियाभर में पहचान मिली है।