नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अनुसार, किसी वाहन मालिक का निवास टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के भीतर है, तो वह टोल शुल्क से पूरी तरह मुक्त होता है। इसके लिए वाहन मालिक को निवास प्रमाण पत्र, जैसे आधार कार्ड, बिजली बिल या कोई अन्य सरकारी पहचान पत्र दिखाना होता है।
यह नियम GNSS (Global Navigation Satellite System) आधारित ‘Pay As You Use’ पॉलिसी का हिस्सा है। इस डिजिटल प्रणाली से वाहनों की दूरी के आधार पर टोल की गणना की जाती है। यह व्यवस्था 24 सितंबर 2024 से चुनिंदा हाईवे पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू है। इस नीति का लक्ष्य स्थानीय लोगों पर आर्थिक बोझ कम करना और डिजिटल टोलिंग को बढ़ावा देना है।
जो लोग टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, वे दैनिक आवाजाही पर कोई शुल्क नहीं देंगे। यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो रोजाना नौकरी, पढ़ाई या बिजनेस के लिए हाईवे का इस्तेमाल करते हैं।
स्थानीय निवासियों के अलावा कई विशेष श्रेणी के वाहन पूरी तरह टोल मुक्त हैं। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकृत वाहन, पुलिस वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के वाहन शामिल हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की राहत और बचाव कार्य में लगी गाड़ियां भी टोल से मुक्त रखी गई हैं। इनका उद्देश्य आपातकालीन सेवाओं को बिना देरी के आवाजाही का अधिकार देना है।
दोपहिया वाहनों पर टोल टैक्स लागू नहीं होता क्योंकि ये सड़क पर कम भार डालते हैं। इनके लिए FASTag भी अनिवार्य नहीं है। इसी तरह पैदल चलने वालों पर भी कोई शुल्क नहीं लगता।
GNSS आधारित डिजिटल टोलिंग लागू होने के बाद FASTag की निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि वर्तमान में अधिकांश टोल प्लाजा पर FASTag अनिवार्य है और इसी के जरिए टोल राशि काटी जाती है। भविष्य में दूरी-आधारित टोलिंग लागू होने पर सिस्टम और भी पारदर्शी होगा।
जो लोग रोजाना टोल पार करते हैं, उनके लिए यह नियम बड़ी राहत लेकर आया है। 20 किमी रेडियस में रहने वाले यात्रियों के लिए यह छूट ईंधन और टोल पर हर महीने होने वाले खर्च को काफी कम कर देगी। इससे दैनिक आवागमन आसान और किफायती बनेगा।