भारत में कई ऐसी झीलें हैं जो अपने अलग-अलग रंगों की वजह से मशहूर हैं। कहीं पानी गुलाबी दिखता है, कहीं हरा या नीला, तो कहीं झील का रंग मौसम के साथ बदलता नजर आता है। ये जगहें किसी जादुई दुनिया से कम नहीं लगतीं।
अगर आपको लगता है कि झीलें सिर्फ नीले रंग की होती हैं, तो भारत की ये जगहें आपकी सोच बदल देंगी। यहां प्रकृति हर मौसम, हर रोशनी और हर जगह पर अपना अलग रंग दिखाती है। इन्हीं झीलों में एक नाम महाराष्ट्र की लोणार झील का भी है। यह झील उल्कापिंड के टकराने से बनी थी। जो मौसम के अनुसार रंग बदलती है।
चांद के आकार वाली यह झील दिनभर एक जैसी नहीं दिखती। सुबह हल्का नीला, दोपहर में फ़िरोज़ी और शाम होते-होते गहरा नीला रंग इसे हर घंटे नया लुक देता है।
समुद्र तल से बहुत अधिक ऊंचाई पर स्थित यह झील अपने क्रिस्टल जैसे साफ पानी के लिए जानी जाती है। धूप पड़ने पर इसका रंग पन्ने जैसा चमकता है और पूरा नजारा किसी पोस्टकार्ड जैसा लगता है।
देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील सांभर कई बार गुलाबी रंग की चादर ओढ़ लेती है। खास मौसम में यहां सूक्ष्म जीवों और नमक की वजह से पानी का रंग बदलता दिखाई देता है। फ्लेमिंगो पक्षियों के आने से इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है।
यह झील अपने रंग से ज्यादा तैरते हुए हरे-भरे द्वीपों (फुमदी) के लिए मशहूर है। ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे हरे रंग की गोल-गोल चादरें पानी पर तैर रही हों। यह नजारा भारत में कहीं और देखने को नहीं मिलता।
'त्सो मारपो' का मतलब ही है लाल झील। आसपास की मिट्टी, खनिज और रोशनी के असर से इसका रंग अलग दिखाई देता है। यह लद्दाख की कम चर्चित लेकिन बेहद अनोखी जगहों में से एक है।(Photo Credit - askmanav)
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित नाको झील अपनी शांत वादियों और साफ नीले पानी के लिए जानी जाती है। समुद्र तल से करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर बनी यह झील मौसम के साथ अलग-अलग रंगों में नजर आती है।