'कोल्ड डेजर्ट' कहलाती है भारत की ये जगह, Land of High Passes के नाम से भी है मशहूर

भारत में एक ऐसा अनोखा क्षेत्र है जिसे कोल्ड डेजर्ट के रूप में जाना जाता है, जहां ठंड और शुष्कता का संगम देखने को मिलता है। यह इलाका अपनी अत्यधिक ऊंचाई और कठोर जलवायु के कारण विशेष पहचान रखता है। इसी वजह से इसे “Land of High Passes” यानी ऊंचे दर्रों की धरती भी कहा जाता है।

Authored by: निलेश द्विवेदीUpdated Dec 22 2025, 17:08 IST
​रेगिस्तान क्या होता है?Image Credit : Canva01 / 07

​रेगिस्तान क्या होता है?

रेगिस्तान ऐसे विस्तृत क्षेत्र होते हैं जहां जलवायु बेहद शुष्क रहती है और साल भर में बहुत कम बारिश होती है, अक्सर 25 सेंटीमीटर से भी कम। पानी की कमी के कारण यहां पौधों की संख्या सीमित होती है और जीवन की परिस्थितियां काफी कठोर होती हैं। आम धारणा के विपरीत, सभी रेगिस्तान गर्म नहीं होते। कुछ रेगिस्तान अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं, जैसे अंटार्कटिका। इन इलाकों की पहचान कम आर्द्रता, तेज़ हवाओं और या तो रेतीले टीलों या फिर कठोर, पथरीली ज़मीन से होती है। ऐसे वातावरण में केवल वही जीव-जंतु और वनस्पतियां टिक पाती हैं, जो इन कठिन परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल चुकी होती हैं। पर क्या आपने भारत के 'कोल्ड डेजर्ट' के बारे में सुना है?

​भारतीय रेगिस्तानImage Credit : Canva02 / 07

​भारतीय रेगिस्तान

भारत का प्रमुख रेगिस्तानी क्षेत्र थार मरुस्थल, जिसे ग्रेट इंडियन डेजर्ट (Great Indian Desert) भी कहा जाता है, भारत-पाकिस्तान सीमा के पास फैला हुआ है। यह एक विस्तृत, अत्यधिक गर्म और शुष्क भूभाग है, जो मुख्य रूप से राजस्थान में स्थित है और इसके साथ-साथ गुजरात, पंजाब तथा हरियाणा के कुछ हिस्सों तक फैलता है। थार मरुस्थल दुनिया के बड़े उपोष्णकटिबंधीय रेगिस्तानों में गिना जाता है, जहां वर्षा बहुत कम होती है, विशाल रेत के टीले पाए जाते हैं और जलवायु काफी कठोर रहती है। इसके बावजूद, यह क्षेत्र अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और विशिष्ट वन्यजीवों के कारण विशेष पहचान रखता है।

​भारत का कोल्ड डेजर्टImage Credit : Canva03 / 07

​भारत का कोल्ड डेजर्ट

भारत का शीत मरुस्थल (कोल्ड डेजर्ट) मुख्य रूप से लद्दाख क्षेत्र में पाया जाता है। यह हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित एक ऊंचाई वाला ठंडा और अत्यंत शुष्क क्षेत्र है। यहां वर्षा बहुत कम होती है और सर्दियों में तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है, जिससे यह इलाका एक विशिष्ट और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र का रूप ले लेता है। इसी श्रेणी में हिमाचल प्रदेश का स्पीति घाटी क्षेत्र भी आता है, जो अपनी कठोर जलवायु और अनोखे प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है।

​लद्दाख की खासियतImage Credit : Canva04 / 07

​लद्दाख की खासियत

लद्दाख भारत का एक आकर्षक, अत्यंत ठंडा और ऊंचाई पर स्थित पठारी क्षेत्र है, जो हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रेणियों के बीच फैला हुआ है। 31 अक्टूबर 2019 को यह जम्मू-कश्मीर से अलग होकर एक स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आया। लद्दाख अपनी मनमोहक प्राकृतिक छटाओं, गहरी जड़ें जमाए बौद्ध परंपराओं, प्राचीन मठों और विशिष्ट जीवनशैली के कारण देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है।

​Land of High PassesImage Credit : Canva05 / 07

​Land of High Passes

लद्दाख को अक्सर “ऊंचे दर्रों की धरती” (Land of High Passes) भी कहा जाता है, क्योंकि यह हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा हुआ क्षेत्र है, जहां अनेक ऊंचाई पर स्थित पहाड़ी दर्रे पाए जाते हैं। खारदुंग ला, चांग ला और तांगलांग ला जैसे दर्रे दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य मार्गों में गिने जाते हैं, जो इस दुर्गम इलाके को अन्य क्षेत्रों से जोड़ने का काम करते हैं। वास्तव में, ‘लद्दाख’ शब्द का अर्थ भी यही दर्शाता है। यहां ‘ला’ का मतलब दर्रा होता है, जो इस क्षेत्र की भौगोलिक पहचान को स्पष्ट करता है।

​सबसे ऊंचा एयरपोर्ट भी है यहांImage Credit : Canva06 / 07

​सबसे ऊंचा एयरपोर्ट भी है यहां

भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित हवाई अड्डा कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डा है, जो लद्दाख के लेह शहर में स्थित है। यह हवाई अड्डा समुद्र तल से लगभग 3,256 मीटर (10,682 फीट) की ऊचाई पर बना हुआ है। इसे भारत का सबसे ऊंचा वाणिज्यिक हवाई अड्डा माना जाता है और यह विश्व के सबसे अधिक ऊंचाई वाले हवाई अड्डों में भी शामिल है। चारों ओर ऊंची हिमालयी पर्वत चोटियों से घिरा यह हवाई अड्डा अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण विशेष महत्व रखता है।

​इसके लिए भी है लद्दाख मशहूरImage Credit : Canva07 / 07

​इसके लिए भी है लद्दाख मशहूर

लद्दाख अपने मनमोहक खगोलीय दृश्यों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां की अधिक ऊंचाई, पतली व शुष्क हवा, कम आर्द्रता और लगभग न के बराबर प्रकाश प्रदूषण के कारण रात का आसमान असाधारण रूप से साफ दिखाई देता है। इन परिस्थितियों में आकाशगंगा (मिल्की वे) सहित कई तारामंडल और खगोलीय पिंड नंगी आंखों से भी स्पष्ट देखे जा सकते हैं। यही कारण है कि लद्दाख में स्थित हैनले वेधशाला को भारत की सबसे ऊंचाई पर बनी खगोलीय वेधशाला माना जाता है, जो खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

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