मुगल बादशाह अकबर ने आगरा किले का निर्माण करवाया था और इसे अपनी राजधानी के रूप में चुना था। यह विशाल किला मुगलिया सल्तनत की निशानी है और दो सौ साल तक मुगलों की सत्ता का केंद्र रहा।
आगरा के किले में कुल चार गेट हैं। इन गेटों को इस तरह से बनाया गया है कि एक गेट से दूसरा नजर नहीं आता। इन्हें जिग-जैग बनाने के पीछे कारण दुश्मन की रफ्तार को धीमा करना था।
आगरा के किले में मौजूद चारों गेटों के नाम खिजरी गेट, अमर सिंह गेट, दिल्ली गेट और गजनी गेट हैं। बता दें कि सिर्फ अमर सिंह गेट ही आम जनता के लिए अब खुला है। पूर्व में दिल्ली गेट के सामने एक दीवार थी, जिसे त्रिपोलिया कहा जाता था।
त्रिपोलिया यानी तीन गेट के पास मुगल काल और उसके बाद भी बाजार लगा करता था। साल 1875 में मिलिट्री ने इस पूरे इलाके को खाली करवा लिया था।
मुगल बादशाह शाहजहां के एक सेनापति का नाम अमर सिंह राठौर था। शाहजहां की मौजूदगी में अमर सिंह की हत्या के बाद राजपूतों ने जब मुगलों पर हमला किया तो यह दरवाजा राजपूतों की वीरता की निशानी के रूप में अमर सिंह दरवाजा कहलाया।
आगरा किले में मौजूद अकबर दरवाजा या अकबरी गेट को बनने में 95 साल लग गए थे। यह गेट दिल्ली गेट की तरह ही डिजाइन किया गया है। बाद में शाहजहां ने इक गेट का नाम बदलकर अमर सिंह दरवाजा कर दिया था।