कुवैत नाम का देश भूगोल के हिसाब से बहुत बड़ा नहीं है इसका क्षेत्रफल सिर्फ़ लगभग 17,818 वर्ग किलोमीटर है और यह फारस की खाड़ी के उत्तर-पूर्व में स्थित है। लेकिन छोटे आकार के बावजूद यह दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है, क्योंकि यहां तेल यानी “काला सोना” भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
कुवैत के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। यहां स्थापित पेट्रोलियम भंडार देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। कुल साबित तेल भंडार में कुवैत का हिस्सा अनुमानतः 104 अरब बैरल है जो दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग 8 प्रतिशत के बराबर है।
तेल को “Black Gold” यानी काला सोना इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह कच्चा तेल भले ही काला और तरल दिखाई दे, लेकिन इसकी आर्थिक कीमत सोने जितनी कीमती है। तेल को निकालकर दुनिया भर में पेट्रोल, डीज़ल, जे़ट फ्यूल, पेट्रोकेमिकल और कई औद्योगिक उत्पाद बनाए जाते हैं। कुवैत के विशाल तेल भंडारों ने इसे “Black Gold” का देश बना दिया है।
कुवैत का Great Burgan Oil Field दुनिया के सबसे बड़े पारंपरिक तेल क्षेत्रों में से एक है। बर्गन क्षेत्र में तीन बड़े सब-फील्ड शामिल हैं Burgan, Al-Maqwa और Al-Ahmadi। यही क्षेत्र देश के अधिकांश तेल उत्पादन का स्रोत है और इसे विश्व की दूसरी सबसे बड़ी तेल भंडार संरचना माना जाता है।
कुवैत न सिर्फ तेल का विशाल भंडार रखता है, बल्कि यह दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक भी है। देश हर रोज़ लाखों बैरल कच्चा तेल उत्पादन करता है और इसका बड़ा हिस्सा विश्व के कई देशों को निर्यात किया जाता है। तेल निर्यात से मिलने वाली राशि कुवैत के राष्ट्रीय खज़ाने में भारी योगदान देती है।
कुवैत की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से तेल पर निर्भर है। पेट्रोलियम से मिलने वाली आमदनी देश की आय का मुख्य स्रोत है और इसके जरिए कुवैत अपनी सरकारी सेवाओं, बुनियादी ढांचे, रोजगार योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के खर्चों को पूरा करता है। इस वजह से तेल कुवैत की “कमाई की रीढ़” के समान है।
तेल खोजने से पहले कुवैत एक छोटा-सा व्यापार केंद्र था। तेल के मिलने के बाद उसकी भागदौड़ बदल गई देश की आमदनी बढ़ी, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें, सुविधाएं और आर्थिक शक्ति विकसित हुई। तेल कुवैत को एक छोटे रेगिस्तान से विश्व की महत्त्वपूर्ण ऊर्जा संपन्न अर्थव्यवस्था में बदलने में मददगार रहा है।
कुवैत सिर्फ तेल का उत्पादन नहीं करता, बल्कि वह OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries) का भी महत्वपूर्ण सदस्य है। OPEC देशों के साथ मिलकर यह तेल उत्पादन, वितरण और कीमतों पर वैश्विक नीति बनाने में भी भूमिका निभाता है। इससे कुवैत को ऊर्जा बाजार में प्रभावशाली स्थान मिलता है और “काला सोना” की कमाई दुनिया भर में महसूस होती है।