रेयर अर्थ मैग्नेट दरअसल ऐसे परमानेंट मैग्नेट होता है जो रेयर अर्थ एलिमेंट और दूसरे धातुओं को मिलाकर बनता है। ये आम मैग्नेट के मुकाबले बहुत ज्यादा ताकतवर होता है। इसका कई तरह की मशीनें और उपकरण चलाने में इस्तेमाल किया जाता है।
रेयर अर्थ मैग्नेट की सबसे बड़ी खासियत है इनकी हाई मैग्नेटिक स्ट्रेंथ, हाई कोअर्सिविटी और हाई एनर्जी प्रोडक्ट। मतलब ये मैग्नेट ज्यादा जोर से आकर्षित या दूर धकेलते हैं, आसानी से डिमैग्नेट नहीं होते और बहुत ज्यादा मैग्नेटिक ऊर्जा जमा कर सकते हैं।
रेयर अर्थ मैग्नेट में अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्यादा होती है। यही इलेक्ट्रॉन एक बहुत मजबूत मैग्नेटिक फील्ड बनाते हैं। साथ ही इनमें मैग्नेटिक मोमेंट एक दिशा में मजबूती से सजे रहते हैं, जिस से ये आसानी से कमजोर नहीं होता।
रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक मोटर, जनरेटर, हार्ड डिस्क ड्राइव, एमआरआई मशीन, हेडफोन, माइक्रोफोन, मैग्नेटिक बेयरिंग, मैग्नेटिक सेपरेटर और मैग्नेटिक ज्वेलरी जैसे कई उपकरणो में होता है। आधुनिक तकनीक में इनकी बड़ी भूमिका है।
ये मैग्नेट नियोडिमियम, प्रेसियोडिमियम और डिसप्रोसियम जैसे रेयर अर्थ तत्वो को आयरन, बोरॉन और कभी-कभी कोबाल्ट जैसे धातुओ के साथ मिलाकर बनाया जाता है। यह मिश्रण इन्हे बहुत ज्यादा मैग्नेटिक बनाता है।
पहले इन तत्वों को जमीन से निकाला जाता है। फिर इन्हे दूसरे धातुओ के साथ पिघलाकर एलॉय बनाया जाता है। इसके बाद इन्हे उच्च तापमान पर सिंटर किया जाता है ताकि मैग्नेट मजबूत और टिकाऊ बन सके। आखिर में इन्हे बहुत शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड में रखकर मैग्नेटाइज किया जाता है।
केंद्र सरकार ने रेयर अर्थ मैग्नेट की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए 7280 करोड़ रुपये की एक खास योजना मंजूर की है। इस योजना का लक्ष्य है हर साल 6000 मीट्रिक टन सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन करना।
सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेन्स जैसे क्षेत्रों में बहुत जरूरी हैं। यह योजना भारत में एक इंटिग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम बनाने में मदद करेगी और देश को रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी।