खड़ा करना चाहते हैं खुद का बिजनेस? सरकार की ये लोन योजनाएं करेंगी आपकी मदद!

Government Loan Schemes: माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज यानी एमएसएमई को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। देश की जीडीपी में इनका योगदान लगभग 30 प्रतिशत है और यह सेक्टर 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। गांव से लेकर शहर तक छोटे उद्योग, दुकानें, सर्विस प्रोवाइडर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स इसी श्रेणी में आते हैं। भारत के समग्र आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने में एमएसएमई की भूमिका बेहद अहम है।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated Jan 23 2026, 14:54 IST
​एमएसएमई के सामने सबसे बड़ी चुनौती: सस्ता कर्ज​Image Credit : Istock01 / 07

​एमएसएमई के सामने सबसे बड़ी चुनौती: सस्ता कर्ज​

हालांकि एमएसएमई सेक्टर की अहमियत बहुत ज्यादा है, लेकिन इस क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती आज भी आसान और सस्ते कर्ज की उपलब्धता है। छोटे कारोबारियों के पास अक्सर कोलैटरल नहीं होता, जिससे उन्हें बैंक से लोन लेने में परेशानी होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एमएसएमई के लिए कई खास लोन और सब्सिडी योजनाएं शुरू की हैं।

​प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: छोटे कारोबारियों का सहारा​Image Credit : Istock02 / 07

​प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: छोटे कारोबारियों का सहारा​

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की शुरुआत साल 2015 में की गई थी। इस योजना का मकसद गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि छोटे कारोबारियों को वित्तीय मदद देना है। इसके तहत 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। मुद्रा लोन को तीन हिस्सों में बांटा गया है। शिशु (50 हजार रुपये तक), किशोर (50,001 से 5 लाख रुपये) और तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपये तक)। यह लोन बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के जरिए मिलता है।

​पीएमईजीपी: स्वरोजगार को बढ़ावा देने की योजना​Image Credit : Istock03 / 07

​पीएमईजीपी: स्वरोजगार को बढ़ावा देने की योजना​

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का उद्देश्य युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को खुद का कारोबार शुरू करने के लिए प्रेरित करना है। इस योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 25 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन मिलता है। खास बात यह है कि इसमें 15 से 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जाती है, जो आवेदक की श्रेणी और क्षेत्र पर निर्भर करती है।

​बिना गारंटी लोन की सुविधा: सीजीटीएमएसई​Image Credit : Istock04 / 07

​बिना गारंटी लोन की सुविधा: सीजीटीएमएसई​

क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज यानी सीजीटीएमएसई योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है। इस योजना में 2 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता है। 5 लाख रुपये तक के लोन पर 85 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज मिलती है, जबकि इससे ज्यादा रकम के लोन पर 75 प्रतिशत तक की गारंटी दी जाती है। इससे बैंकों का जोखिम कम होता है और एमएसएमई को लोन मिलना आसान हो जाता है।

​तकनीक अपग्रेडेशन के लिए सीएलसीएसएस योजना​Image Credit : Istock05 / 07

​तकनीक अपग्रेडेशन के लिए सीएलसीएसएस योजना​

जो एमएसएमई नई और आधुनिक तकनीक अपनाना चाहते हैं, उनके लिए क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (सीएलसीएसएस) बेहद फायदेमंद है। इस योजना के तहत 1 करोड़ रुपये तक के लोन पर 15 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। इसका उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की उत्पादकता बढ़ाना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

​फंड ऑफ फंड्स और स्माइल योजना से मिलेगा विस्तार​Image Credit : Istock06 / 07

​फंड ऑफ फंड्स और स्माइल योजना से मिलेगा विस्तार​

एमएसएमई में इक्विटी की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड्स शुरू किया है। इसके जरिए ग्रोथ की क्षमता रखने वाले एमएसएमई को वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी निवेश मिलता है। वहीं सिडबी की स्माइल योजना के तहत एमएसएमई को सॉफ्ट लोन दिया जाता है। इसमें मशीनरी के लिए कम से कम 10 लाख और अन्य जरूरतों के लिए 25 लाख रुपये तक का लोन मिलता है, जिसकी चुकाने की अवधि 10 साल तक हो सकती है।

​59 मिनट में एमएसएमई लोन: डिजिटल सुविधा​Image Credit : Istock07 / 07

​59 मिनट में एमएसएमई लोन: डिजिटल सुविधा​

सरकार ने ‘59 मिनट में एमएसएमई लोन’ योजना के जरिए लोन अप्रूवल प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। इस योजना में 1 लाख से 5 करोड़ रुपये तक का लोन मिलता है और ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से शुरू होती है। जीएसटी और आईटी कंप्लायंट बिजनेस इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण लोन जल्दी मंजूर होकर जारी हो जाता है।

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