रिलायंस इंडस्ट्रीज ने '2025 फॉर्च्यून ग्लोबल 500' की ताजा सूची में 88वां स्थान हासिल किया है। यह किसी भी भारतीय कंपनी के लिए सबसे ऊंची रैंकिंग है। साल दर साल रिलायंस ने इस लिस्ट के टॉप-100 में अपनी जगह बनाए रखी है, जो इसकी जबरदस्त वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) फरवरी 2026 में भी भारतीय शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) लगभग ₹19.21 लाख करोड़ (करीब $230 बिलियन) के स्तर पर है। हालांकि, बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव के कारण इसके मूल्यांकन में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन एनर्जी, रिटेल और टेलीकॉम (Jio) क्षेत्रों में इसके मजबूत प्रदर्शन ने इसे वैश्विक स्तर पर 'फॉर्च्यून ग्लोबल 500' की टॉप-100 कंपनियों की सूची में मजबूती से बनाए रखा है।
रिलायंस की ग्लोबल रैंकिंग में सबसे बड़ा योगदान इसके ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस का है। जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के दम पर रिलायंस ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी का रेवेन्यू रिकॉर्ड स्तर पर रहता है।
रिलायंस रिटेल अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ पार्टनरशिप और देश भर में हजारों स्टोर्स के जाल ने इसे दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते रिटेलर्स की सूची में शामिल कर दिया है। रिटेल सेगमेंट से होने वाली कमाई ने रिलायंस को फॉर्च्यून लिस्ट में टॉप-100 के भीतर मजबूती से टिकाए रखा है।
रिलायंस जियो (Jio) ने न केवल भारत में इंटरनेट की तस्वीर बदली, बल्कि वैश्विक निवेशकों (जैसे फेसबुक और गूगल) का ध्यान भी खींचा। जियो की वजह से रिलायंस अब एक 'डेटा कंपनी' के रूप में पहचानी जाती है, जिससे इसकी वैश्विक साख (Global Valuation) में भारी इजाफा हुआ है।
दुनिया अब रिलायंस को सिर्फ एक तेल कंपनी के रूप में नहीं देख रही है। अक्षय ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में मुकेश अंबानी के भारी निवेश के ऐलान ने इसे वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है। रिलायंस का लक्ष्य 2035 तक 'नेट कार्बन जीरो' बनना है, जो इसकी फ्यूचर रैंकिंग को और ऊपर ले जाएगा।
ग्लोबल मार्केट में रिलायंस अब वॉलमार्ट, एक्सॉन मोबिल और शेल जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। हालांकि रेवेन्यू के मामले में वह अभी टॉप-10 में नहीं है, लेकिन जिस रफ्तार से रिलायंस अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रही है, वह दिन दूर नहीं जब यह टॉप-50 में अपनी जगह बना लेगी।