तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की कुल संपत्ति के साथ एचसीएल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन शिव नादर न केवल एक व्यवसायी हैं, बल्कि एक परोपकारी व्यक्ति भी हैं, जिनका योगदान भारत के शिक्षा क्षेत्र और उससे परे महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ रहा है। एडेलगिव-हुरुन इंडिया परोपकार लिस्ट 2024 के मुताबिक नादर वित्त वर्ष 2023-24 में देश के सबसे उदार परोपकारी व्यक्ति के रूप में उभरे, जिन्होंने 2,153 करोड़ रुपये दान दिया। इसका मतलब है कि उन्होंने वित्तीय वर्ष के हर एक दिन में करीब 6 करोड़ रुपये दान दिया।
एडेलगिव-हुरुन इंडिया परोपकार लिस्ट 2024 भारतीय अरबपतियों की उदारता को बताती है, जिसमें वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 8,783 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कुल दान शामिल है, जो पिछले साल की तुलना में 4% की वृद्धि हुई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 55% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है, जो भारत के सबसे धनी व्यक्तियों के बीच दान देने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
परोपकारियों द्वारा दिया गया अधिकांश दान एजुकेशन पर खर्च होता है, जिसमें 3,680 करोड़ रुपये इस उद्देश्य के लिए आवंटित किए गए। स्वास्थ्य सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान देखा गया, जिसकी राशि 626 करोड़ रुपये थी। 100 करोड़ रुपये से अधिक दान देने वाले परोपकारी व्यक्तियों की संख्या 2018 में केवल दो थी, बढ़कर 2024 में 18 हो गई है, जो सामाजिक मुद्दों के प्रति धनी लोगों के बीच व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
शिव नादर का परोपकार में योगदान बेमिसाल है। वित्त वर्ष 24 में उन्होंने 2,153 करोड़ रुपये का दान दिया, जो भारत के टॉप 10 परोपकारी लोगों द्वारा दिए गए कुल दान का करीब एक चौथाई है। उनका परोपकारी ध्यान मुख्य रूप से एजुकेशन पर रहा है। एक ऐसा कारण जो उनके दिल के बहुत करीब है।
शिक्षा के प्रति नादर की प्रतिबद्धता 1996 में शुरू हुई जब उन्होंने चेन्नई में SSN कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना की, जिसका नाम उनके पिता शिवसुब्रमण्य नादर के नाम पर रखा गया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखा है, जिसमें विद्याज्ञान का निर्माण भी शामिल है, जो वंचित समुदायों के ग्रामीण बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्कूलों का एक नेटवर्क है। शिक्षा पर उनका ध्यान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जैसे संस्थानों का समर्थन करने में उनकी भूमिका तक फैला हुआ है। 2011 में नादर ने अपने पूर्व स्कूल को 80 लाख रुपये का दान दिया और अपने पूरे करियर में कई शैक्षिक पहलों में एक्टिव रूप से शामिल रहे हैं।
शिव नादर ने 1976 में 5 सह-संस्थापकों के साथ एक छोटे से गैरेज से एचसीएल टेक्नोलॉजीज की स्थापना की थी। आज एचसीएल एक ग्लोबल आईटी दिग्गज कंपनी बन गई है, जिसका राजस्व 13.4 बिलियन डॉलर (1 लाख करोड़ रुपये से अधिक) है। नादर ने 2020 में चेयरमन के रूप में अपनी भूमिका से इस्तीफा दे दिया और नेतृत्व की कमान अपनी बेटी रोशनी नादर मल्होत्रा को सौंप दी। हालांकि एक्टिव नेतृत्व से हटने के बावजूद नादर के परोपकारी उपक्रम फलते-फूलते रहे हैं, खासकर शिव नादर फाउंडेशन के जरिये। फाउंडेशन लगातार उनके परोपकारों के प्रयासों में सबसे आगे रहा है। एजुकेशन, ग्रामीण विकास और बहुत कुछ पर ध्यान केंद्रित करता है।
परोपकार में शिव नादर (Shiv Nadar) का योगदान बेजोड़ है, वहीं अन्य उल्लेखनीय परोपकारी लोगों ने भी वित्त वर्ष 2023-24 में महत्वपूर्ण दान दिया है। यहां जानिए कुछ टॉप दानकर्ताओं ने कितने दान किये।मुकेश अंबानी और परिवार: रिलायंस फाउंडेशन के जरिये 407 करोड़ रुपये दान दिये।बजाज परिवार: 352 करोड़ रुपये दान दिए।कुमार मंगलम बिड़ला और परिवार: 334 करोड़ रुपये दान दिये।गौतम अडानी और परिवार: 330 करोड़ रुपये दान दिये।नंदन नीलेकणी: 307 करोड़ रुपये दान दिये।कृष्णा चिवुकुला: आईआईटी मद्रास को 228 करोड़ रुपये दान दिये।अनिल अग्रवाल और परिवार: 128 करोड़ रुपये दान दिये।सुस्मिता और सुब्रतो बागची: 179 करोड़ रुपये दान दिये।रोहिणी नीलेकणी: 154 करोड़ रुपये दान दिये।