लगातार शेयर मार्केट हो रहा क्रैश तो क्या निकाल लेना चाहिए म्यूचुअल फंड का पैसा?

What to do with Mutual Funds in Share Market Crash (मार्केट क्रैश हो तो क्या निकाल लेना चाहिए म्यूचुअल फंड का पैसा)? शेयर बाजार में जब अचानक तेज गिरावट आती है और म्यूचुअल फंड की NAV रोजाना टूटती दिखती है, तो निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या अब पैसा निकाल लेना चाहिए। डर, अनिश्चितता और लाल रंग में डूबे स्क्रीन निवेशकों को पैनिक मोड में डाल देते हैं। लेकिन इतिहास बताता है कि हर बड़ा मार्केट क्रैश निवेशकों के लिए सिर्फ नुकसान नहीं, बल्कि एक अहम सबक भी छोड़कर गया है। इस फोटो स्टोरी में हम हिस्टोरिकल डेटा के आधार पर समझेंगे कि बाजार गिरने के दौर में म्यूचुअल फंड निवेशकों को घबराने के बजाय किस रणनीति पर टिके रहना चाहिए।

Authored by: यतींद्र लवानियाUpdated Jan 12 2026, 15:53 IST
बाजार गिरा, डर बढ़ा Image Credit : Canva01 / 05

बाजार गिरा, डर बढ़ा

जब शेयर बाजार लगातार टूटता है, तो सबसे पहले असर निवेशकों के मनोविज्ञान पर पड़ता है। म्यूचुअल फंड की NAV घटती दिखती है और यही डर “पैसा निकाल लेना चाहिए या नहीं” जैसे सवाल खड़े करता है। इतिहास देखें तो 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस, 2020 का कोविड क्रैश और उसके बाद के कई करेक्शन फेज में यही माहौल बना। हर बार बाजार में भारी गिरावट आई, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि बाजार कभी शून्य नहीं हुआ और समय के साथ उसने वापसी की।

पैनिक सेलिंग क्यों बनती है सबसे बड़ी गलतीImage Credit : Canva02 / 05

पैनिक सेलिंग क्यों बनती है सबसे बड़ी गलती

हिस्टोरिकल डाटा बताता है कि बाजार के सबसे खराब और सबसे अच्छे दिन अक्सर बहुत पास-पास आते हैं। कई सालों में यह अंतर कुछ दिनों से लेकर एक-दो हफ्ते तक का ही रहा है। 2008, 2004 और 2020 जैसे वर्षों में जिन निवेशकों ने डर के कारण सबसे नीचे बेच दिया, वे उसके तुरंत बाद आई तेज रिकवरी से बाहर रह गए। यही वजह है कि पैनिक सेलिंग न सिर्फ मौजूदा नुकसान को पक्का करती है, बल्कि भविष्य के रिटर्न का मौका भी खत्म कर देती है।

हर क्रैश के बाद रिकवरीImage Credit : Canva03 / 05

हर क्रैश के बाद रिकवरी

लंबी अवधि का डेटा साफ बताता है कि भारतीय शेयर बाजार ने हर बड़े क्रैश के बाद मजबूत वापसी की है। 2008 के संकट के बाद बाजार को नया हाई बनाने में समय लगा, लेकिन आखिर में निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिला। 2020 के कोविड क्रैश के बाद तो रिकवरी और भी तेज रही और एक साल से कम समय में नुकसान की भरपाई हो गई। इसका मतलब साफ है कि गिरावट अस्थायी होती है, जबकि लॉन्ग टर्म ट्रेंड ऊपर की ओर रहता है।

​SIP निवेशकों को क्रैश में क्यों मिला फायदाImage Credit : Canva04 / 05

​SIP निवेशकों को क्रैश में क्यों मिला फायदा

मार्केट क्रैश का सबसे बड़ा फायदा SIP निवेशकों को मिलता है। जब बाजार गिरता है, तब NAV कम होती है और हर महीने की SIP से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। 2020 के कोविड क्रैश के दौरान जिन निवेशकों ने अपनी SIP जारी रखी, उन्होंने 2021 से 2024 के बीच बेहतर औसत रिटर्न हासिल किया। इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है, जो बाजार की अस्थिरता को निवेशक के पक्ष में बदल देती है।

क्या हो रणनीति?Image Credit : Canva05 / 05

क्या हो रणनीति?

इतिहास बार-बार यही सिखाता है कि मार्केट क्रैश में म्यूचुअल फंड से पैसा निकालना समाधान नहीं है। सही रणनीति यह है कि निवेशक घबराहट से दूर रहकर SIP जारी रखें, अपने एसेट एलोकेशन की समीक्षा करें और इमरजेंसी फंड को मजबूत बनाएं। क्रैश आते-जाते रहेंगे, लेकिन जो निवेशक धैर्य और अनुशासन बनाए रखता है, वही लंबे समय में असली विजेता बनता है।

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