रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस रिटेल ने अपनी पूरी हिस्सेदारी 274 करोड़ रुपये में बेच दी है। यह सौदा एकमुश्त यानी 100% इक्विटी हिस्सेदारी के रूप में किया गया है। कंपनी ने यह जानकारी बाजार को दी है, जिससे यह साफ हो गया कि यह एक आधिकारिक और बड़ा कॉरपोरेट ट्रांजैक्शन है।
इस डील में खरीदार जयपुर एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड है। रिलायंस की ओर से यह भी बताया गया है कि खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज, उसके प्रमोटर ग्रुप या किसी भी संबंधित ग्रुप कंपनी से जुड़ी हुई नहीं है। यानी यह एक बाहरी और स्वतंत्र खरीदार है, जिसने यह पूरी हिस्सेदारी खरीदी है।
वित्त वर्ष 31 मार्च 2025 तक RPPMSL का रिलायंस ग्रुप के कुल कारोबार में योगदान भी सामने आया है। इस अवधि में कंपनी का योगदान करीब ₹6,412.60 करोड़ रहा। हालांकि यह बड़ा नंबर दिखता है, लेकिन रिलायंस के कुल टर्नओवर के मुकाबले इसका हिस्सा बहुत छोटा है। यह केवल 0.06% के आसपास है।
31 मार्च 2025 तक RPPMSL की नेटवर्थ ₹342.45 करोड़ दर्ज की गई थी। यह भी रिलायंस के कुल नेटवर्थ का बहुत ही छोटा हिस्सा है, करीब 0.04% के आसपास। इससे यह समझ आता है कि यह कंपनी रिलायंस ग्रुप के बड़े बिजनेस का एक छोटा लेकिन सपोर्टिंग हिस्सा थी।
RPPMSL एक ऐसी कंपनी थी जो मुख्य रूप से आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट और मैनपावर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में काम करती थी। यह रिलायंस रिटेल और डिजिटल इनिशिएटिव्स को सपोर्ट देने का काम करती थी, जिससे ग्रुप के बड़े प्रोजेक्ट्स को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलती थी।
इस कंपनी की शुरुआत 2019 में हुई थी। शुरुआत में इसका नाम रिलायंस डिजिटल प्लेटफॉर्म एंड प्रोजेक्ट सर्विसेज लिमिटेड था। बाद में इसका नाम बदलकर RPPMSL कर दिया गया था। समय के साथ इसका फोकस बदलते हुए यह प्रोजेक्ट और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट से जुड़े कामों में विशेषज्ञ बन गई।
यह डील रिलायंस के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। कंपनी अपने बिजनेस पोर्टफोलियो को लगातार सरल और फोकस्ड बना रही है। छोटे और नॉन-कोर एसेट्स को बेचकर रिलायंस अपने मुख्य बिजनेस जैसे रिटेल, टेलीकॉम और एनर्जी पर ज्यादा ध्यान दे रही है। 274 करोड़ रुपये की यह डील भले ही बड़ी न लगे, लेकिन कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।