झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्रों ने सरकार से अपनी मांगों पर सीधे मुख्यमंत्री से बातचीत करने की मांग की है। इसी बीच झारखंड सरकार के प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के बीच बातचीत को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, छात्र नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें स्पष्ट हैं और उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि बातचीत के लिए कितने लोग जा रहे हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी छात्रों की मांगें एक जैसी हैं और सरकार को इन मांगों को पूरा करना चाहिए।
मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग
प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम ने कहा कि छात्र किसी गुट में बंटे हुए नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में बापू वाटिका से हुई थी।
प्रेम ने कहा कि छात्रों को जानकारी मिल रही है कि मुख्यमंत्री के बजाय उनके मंत्रियों से बातचीत कराई जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से खुद छात्रों के साथ बातचीत करने की अपील की। छात्रों की मांग है कि बातचीत बंद कमरे में न होकर खुले मैदान में हो और इसमें मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी के साथ पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाए। प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि डॉक्टर उन्हें पानी पीने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन छात्रों को लगता है कि सरकार के जागने के इंतजार में वे अपने स्वास्थ्य का त्याग कर रहे हैं।
बीजेपी ने सरकार पर साधा निशाना
JPSC-JSSC आंदोलन को लेकर झारखंड बीजेपी के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 अगस्त को छात्रों के प्रस्तावित विधानसभा महाघेराव को देखते हुए सरकार दबाव में है। प्रतुल शाह देव ने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगें पहले ही स्पष्ट कर दी हैं। उनके मुताबिक छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा रद्द करना, मामले की CBI जांच कराना और TDPL के जरिए कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर मंत्रियों की समिति चाहती तो मुख्यमंत्री से फोन पर बात कर सहमति ले सकती थी, लेकिन बातचीत को अगले दौर के लिए टाल दिया गया। बीजेपी प्रवक्ता ने इसे 10 अगस्त के विधानसभा घेराव को टालने की कोशिश करार दिया।
