डिप्टी गवर्नर रवि शंकर का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी असली अर्थों में करेंसी नहीं है। उन्होंने इसे “सिर्फ कोड का एक टुकड़ा” बताया। RBI के मुताबिक, किसी भी करेंसी में कुछ बुनियादी गुण होने चाहिए, जैसे मूल्य का आधार, भुगतान की गारंटी और जारीकर्ता की जिम्मेदारी। क्रिप्टो में ये सभी चीजें मौजूद नहीं हैं।
RBI का कहना है कि क्रिप्टो टोकन का कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता। न तो इनके पीछे किसी तरह का भुगतान वादा होता है और न ही कोई संस्था इन्हें जारी करती है। इनकी कीमत पूरी तरह बाजार की अटकलों और सट्टे पर निर्भर करती है। यही वजह है कि RBI इन्हें जोखिम भरा मानता है।
भारत में फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह बैन नहीं है। यानी क्रिप्टो में निवेश करना या ट्रेडिंग करना गैरकानूनी नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि इसे अभी तक किसी स्पष्ट कानून के तहत रेगुलेट नहीं किया गया है। सरकार इसे “हाई रिस्क एसेट” मानते हुए भारी टैक्स लगाती है।
सरकार क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30% टैक्स लगाती है। इसके अलावा हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS भी काटा जाता है। यानी मुनाफा हो या नुकसान, टैक्स देना ही पड़ता है। इसी वजह से कई निवेशक इसे टैक्स के लिहाज से भी महंगा सौदा मानते हैं।
भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खासकर 18 से 25 साल के युवा इसमें सबसे ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। डिजिटल टेक्नोलॉजी और जल्दी मुनाफे की उम्मीद के कारण युवा वर्ग क्रिप्टो की ओर आकर्षित हुआ है, लेकिन RBI को यही ट्रेंड सबसे ज्यादा जोखिम भरा लगता है।
जब RBI से पूछा गया कि जोखिम इतने ज्यादा हैं तो सीधा बैन क्यों नहीं लगाया जाता, तो रवि शंकर ने कहा कि यह फैसला आसान नहीं है। किसी भी कदम से पहले सरकार को क्रिप्टो एक्सचेंज, बैंकिंग सिस्टम और निवेशकों जैसे सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करनी होगी। इसलिए फिलहाल इस पर सिर्फ विचार चल रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि क्रिप्टो से सरकार को अच्छी-खासी कमाई भी हुई है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में क्रिप्टो एक्सचेंजों से करीब 1,100 करोड़ रुपये का टैक्स वसूला गया है। वित्त वर्ष 2022-23 में 221 करोड़, 2023-24 में 362 करोड़ और 2024-25 में 511 करोड़ रुपये का TDS जमा हुआ। इसमें सबसे ज्यादा योगदान महाराष्ट्र का रहा है।