खाद्य तेल और दालों के आयात खर्च बढ़ने के बावजूद भारत ने चावल निर्यात के मामले में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इतिहास में पहली बार भारत का चावल एक्सपोर्ट एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। विश्व के कुल चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 30% से अधिक हो गई है, जबकि चीन और पाकिस्तान जैसे देश पीछे रह गए हैं। बासमती और गैर-बासमती चावल दोनों का निर्यात 50-50 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहा।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक 2024-25 में भारत ने 1490.74 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन किया, जो पिछले साल से 112.49 लाख टन अधिक है। घरेलू मांग करीब 1100 लाख मीट्रिक टन है, जिससे 390 लाख मीट्रिक टन चावल का सरप्लस बचता है। भारत ने इस वित्त वर्ष में 202 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया है, जो निर्यात बढ़ाने की क्षमता को दर्शाता है।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCIS) के मुताबिक 2024-25 में भारत का चावल निर्यात 1,05,720 करोड़ रुपये का रहा, जो कृषि निर्यात का 23.42% है। इसमें गैर-बासमती का योगदान 55,408 करोड़ रुपये और बासमती का 50,312 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष के मुकाबले चावल निर्यात से करीब 20,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक और सबसे बड़ा निर्यातक है। करीब 150 देशों में भारतीय चावल की मांग है। गैर-बासमती चावल की सबसे बड़ी खपत करने वाले देश हैं बेनिन, गुएना, कोटे डी आइवर, टोगो और बांग्लादेश। वहीं बासमती चावल के प्रमुख खरीदार सऊदी अरब, इराक, ईरान, यूएई और यमन हैं।
विश्व चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 30% से अधिक है, जबकि पाकिस्तान का हिस्सा केवल 10.7% है और वह चौथे स्थान पर है। चीन, जो सबसे बड़ा चावल उत्पादक है, चावल निर्यात में केवल 2% हिस्सेदारी रखता है क्योंकि उसकी घरेलू खपत अधिक है।
थाईलैंड (16%), वियतनाम (14%), अमेरिका (6%) और कंबोडिया (5%) प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल हैं। थाईलैंड दुनिया का दूसरा और वियतनाम तीसरा सबसे बड़ा चावल निर्यातक है
भारत ने चावल निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और उत्पादन व निर्यात दोनों में वृद्धि के साथ आने वाले वर्षों में नए रिकॉर्ड बनाने की संभावना है।