IGL ने बताया कि यह कदम दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि शहर की हवा साफ रहे और प्रदूषण कम से कम हो। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा मिलेगा, बल्कि दिल्ली में रहने वाले लोगों की सेहत भी सुरक्षित रहेगी।
दिल्ली में यह पहली बार हुआ है कि सीएनजी से चलने वाले वाहनों को भी इस नियम के दायरे में शामिल किया गया है। पहले सिर्फ पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए ही सख्ती थी। अब सभी फ्यूल टाइप के वाहन पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के बिना सीएनजी नहीं ले पाएंगे।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को नई गाइडलाइन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बाहर पंजीकृत कोई भी वाहन, जो BS-VI मानक से कम का है, राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेगा। यह नियम सभी तरह के वाहनों पर लागू होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसमें फ्यूल टाइप के आधार पर कोई छूट नहीं दी गई है।
मंत्री ने कहा कि ट्रकों पर पहले ही दिल्ली में प्रवेश की रोक थी। अब इसके अलावा प्राइवेट गाड़ियों पर भी यह नियम लागू होगा। 17 दिसंबर तक एक दिन की छूट दी गई थी, लेकिन इसके बाद कोई भी BS-VI से कम वाहन, जो दिल्ली में रजिस्टर्ड नहीं है, शहर में नहीं प्रवेश कर सकेगा।
पहले BS-VI से कम पेट्रोल और डीजल वाहनों पर ही रोक थी, जबकि सीएनजी वाहनों को छूट मिलती थी। इस बार यह नियम सीएनजी वाहनों पर भी लागू होने से चालक भ्रमित हो गए थे कि क्या उन्हें राहत मिलेगी या नहीं। IGL ने साफ किया कि अब किसी भी फ्यूल टाइप के वाहन के लिए नियम समान रहेगा।
एनसीआर के अन्य शहरों से आने वाले वाहन चालकों के लिए दिल्ली पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। BS-III और BS-IV सीएनजी वाहनों के दिल्ली प्रवेश के बारे में जानकारी के लिए 011-25844444 और 1095 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। हेल्पलाइन ने पुष्टि की कि यह प्रतिबंध सभी वाहनों पर लागू है।
IGL और सरकार ने सभी सीएनजी चालकों से अपील की है कि वे रिफ्यूलिंग के समय अपने वाहन का वैध PUC सर्टिफिकेट साथ रखें। इससे उन्हें सीएनजी मिलने में कोई समस्या नहीं होगी। यह नियम लंबी अवधि तक दिल्ली में साफ हवा और प्रदूषण नियंत्रण बनाए रखने में मदद करेगा। कुल मिलाकर, 18 दिसंबर 2025 से दिल्ली में सभी वाहनों के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट जरूरी होगा। यह कदम शहर में वायु प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।