यह योजना है डी डी ए (DDA) की, जिसका पूरा नाम दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी है। डीडीए ने अपने जन-साधारण आवास योजना (Jan Sadharan Awas Yojana) के तहत पॉपुलर लोकेशनों में बेहद सस्ते फ्लैट जारी किए। इस योजना का मकसद मुंबई, गुड़गांव या नोएडा जैसे आसपास के शहरों की तुलना में दिल्ली में भी आम लोगों के लिए सस्ती आवास उपलब्ध कराना है।
इस योजना में दो-तीन तरह के फ्लैट शामिल थे 1 BHK, 2 BHK और 3 BHK। खास बात यह रही कि सब्सिडी और आसान ईएमआई विकल्प के बाद 1 BHK फ्लैट की कुल कीमत लगभग ₹9 लाख के आसपास थी। इतना सस्ता घर दिल्ली में होना उन लोगों के लिए बेहद अच्छा मौका था, जो पहली बार अपना घर खरीदना चाहते हैं।
डीडीए ने बुकिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल और बैंकिंग सिस्टम का उपयोग किया। पहले चरण में आवेदन भरे गए और फीस जमा की गई। जैसे ही बुकिंग शुरू हुई, लोगों ने तेजी से आवेदन किया और कुछ घंटों में ही तमाम फ्लैट भर गए। इसका मतलब है कि जमीन पर लोगों की मांग शानदार थी और योजना को खूब सराहना मिली।
यह योजना खास तौर पर उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनके पास अपना घर नहीं है तथा वे मध्यम या निम्न-मध्यम आय वर्ग से आते हैं। इस योजना में प्राथमिकता उन परिवारों को दी गई, जिनकी वार्षिक आय कुछ निर्धारित सीमा से कम है और जिन्होंने पहले कभी घर नहीं खरीदा।
दिल्ली में किसी भी स्थान पर ₹9-10 लाख में घर मिलना सामान्य बात नहीं है। पिछले कुछ सालों से प्रॉपर्टी के दाम बढ़ते चले गए थे, खासकर निजी निर्माण वाली बस्तियों में। इसलिए जब सरकार ने डीडीए-जन-साधारण योजना के तहत फ्लैट इतनी सस्ती कीमत पर पेश किए, तो लोगों को अहसास हुआ कि अब दिल्ली में भी घर सस्ते में मिल सकता है। यही वजह है कि बुकिंग के पहले ही दिन अफरा-तफरी सी मच गई।
अब लोगों की नजरें अगले चरण पर हैं, जहां डी डी ए शायद और अधिक सस्ते फ्लैट उपलब्ध करा सकती है। कई विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि इस तरह की योजनाएँ अगर बड़े पैमाने पर लागू हों तो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आवासीय बाजार में और संतुलन आ सकता है, जिससे रेंट और बिक्री की कीमतों पर भी दबाव कम होगा।
सबसे बड़ा लाभ यह है कि आम लोगों को अपना घर बहुत कम लागत में मिल रहा है और वह भी दिल्ली जैसे शहर में। इसके अलावा दीर्घकालिक ईएमआई विकल्प, सब्सिडी और बैंक सहायता से यह योजना और भी आकर्षक हो जाती है। चुनौतियों के तौर पर यह है कि योजना के तहत जितने फ्लैट पेश किए गए, वे सीमित थे, इसलिए सबको मौका नहीं मिल पाया। इसके अलावा कुछ लोग यह भी सोच रहे हैं कि सस्ते मकानों के बाद रख-रखाव, पार्किंग, सुविधाएँ और आसपास का इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा होगा।