अनिल अंबानी के रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रुप की रक्षा ब्रांच रिलायंस डिफेंस ने अमेरिका की कंपनी कोस्टल मेकैनिक्स (Coastal Mechanics) के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद भारत के ₹20,000 करोड़ के मिलिट्री MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) सेक्टर में प्रवेश करना है।
यह ज्वाइंट वेंचर महाराष्ट्र के नागपुर स्थित MIHAN (मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल कार्गो हब एंड एयरपोर्ट) में स्थापित किया जाएगा। यह विशेष रूप से भारतीय वायुसेना और थलसेना के 200 से अधिक विमानों की मरम्मत और अपग्रेड पर केंद्रित होगा, जिनमें शामिल हैं:- Jaguar फाइटर जेट, MiG-29 विमान, Apache अटैक हेलीकॉप्टर, L-70 एयर डिफेंस गन जैसे पुराने सिस्टम।
यह ज्वाइंट वेंचर निम्नलिखित रक्षा संसाधनों के लिए लाइफ-साइकल सपोर्ट और पूर्ण MRO सेवाएं प्रदान करेगा। 100+ Jaguar एयरक्राफ्ट, 100+ MiG-29 विमान, भारतीय सेना के Apache हेलीकॉप्टरों का बेड़ा साथ ही, जमीन आधारित रक्षा उपकरणों के लिए भी परफॉर्मेंस-बेस्ड लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
कोस्टल मेकैनिक्स, जो अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) की अधिकृत आपूर्तिकर्ता है, के पास शस्त्र प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स और रिवर्स इंजीनियरिंग का विस्तृत अनुभव है। इसके पास गोपनीय तकनीकी डेटा और रक्षा ढांचे की विशेष पहुंच है, जो भारत की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाएगा। कोस्टल मेकैनिक्स के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत की सशस्त्र सेनाएं अब रिप्लेसमेंट से प्लेटफॉर्म अपग्रेड की ओर बढ़ रही हैं – यह साझेदारी उसी ट्रांजिशन को सपोर्ट करेगी।
रिलायंस डिफेंस ने हाल ही में ₹600 करोड़ का गोला-बारूद निर्यात ऑर्डर जर्मनी की Rheinmetall Waffe Munition GmbH से प्राप्त किया है। साथ ही, Diehl Defence के साथ साझेदारी करके रत्नागिरी में 155 mm Vulcano आर्टिलरी म्यूनिशन बनाने की योजना है। रिलायंस डिफेंस की मंशा है कि वह अगले 5 वर्षों में भारत की टॉप-3 डिफेंस एक्सपोर्ट कंपनियों में शामिल हो।
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर दोनों अब कर्ज मुक्त (debt-free) हैं। प्रत्येक की नेट वर्थ और टर्नओवर ₹33,000 करोड़ है। इनका संयुक्त मार्केट कैप ₹45,000 करोड़ के आसपास है। पिछले एक वर्ष में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर 117% तक बढ़े हैं।
यह ज्वाइंट वेंचर भारत के सैन्य प्लेटफॉर्म्स की विदेशी MRO पर निर्भरता को घटाएगा। यह रक्षा क्षेत्र में स्थानीय विशेषज्ञता को बढ़ावा देगा। राष्ट्रीय सुरक्षा और तैयारियों को मजबूती मिलेगी। MIHAN को रक्षा और एयरोस्पेस हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस समझौते से हाई-स्किल्ड नौकरियों का सृजन होगा। स्थानीय निर्माण क्षमता बढ़ेगी। और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। यह साझेदारी भारत की रक्षा क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। Reliance Defence अब न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता बनने की ओर अग्रसर है।