लाइफस्टाइल

सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग क्या है, क्यों बढ़ रहा Parenting के नए तरीके का क्रेज, जान लें इसके फायदे

  • Authored by: Ritu raj
  • Updated Jul 3, 2025, 02:33 PM IST

सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग इन दिनों काफी ट्रेंड में है और पेरेंट्स को पेरेंटिंग का ये तरीका काफी पसंद आ रहा है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग बच्चों की परवरिश का एक आधुनिक तरीका है जिसमें माता-पिता अपने बच्चों के साथ लगातार पीछे-पीछे भागने या हर चीज़ में हस्तक्षेप करने के बजाय, उन्हें एक ही जगह पर बैठकर निगरानी में रखते हुए खुद से खेलने और सीखने का मौका देते हैं।

Image

Sitterwise parenting.

हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि वो अपने बच्चे को अच्छी परवरिश दें। इसके लिए पेरेंट्स, पेरेंटिंग के कई अलग-अलग तरीके अपनाते हैं और हर तरीका बच्चे के विकास पर प्रभाव डालता है। इन दिनों पेरेंटिंग का जो तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है वो है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग। ऐसे में चलिए जानते हैं क्या है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग और क्यों इस नए पेरेंटिंग का क्रेज बढ़ता जा रहा है।

क्या होता है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग?

What is sitterwise parenting

What is sitterwise parenting

सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग इन दिनों काफी ट्रेंड में है और पेरेंट्स को पेरेंटिंग का ये तरीका काफी पसंद आ रहा है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग बच्चों की परवरिश का एक आधुनिक तरीका है जिसमें माता-पिता अपने बच्चों के साथ लगातार पीछे-पीछे भागने या हर चीज़ में हस्तक्षेप करने के बजाय, उन्हें एक ही जगह पर बैठकर निगरानी में रखते हुए खुद से खेलने और सीखने का मौका देते हैं। इसमें माता-पिता बच्चों की हर एक्टिविटी पर नज़र तो रखते हैं, लेकिन उन्हें फ्री छोड़ देते हैं। यह बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इस पेरेंटिंग में फोकस बच्चों के साथ अच्छी बॉन्डिंग पर किया जाता है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग बच्चे और पेरेंट्स के बीच गैप कम करने का काम करते हैं।

कैसे अलग है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग?

पेरेंट्स अपने बच्चों की परवरिश को लेकर काफी एक्टिव हो चुके हैं। आज के इस मॉडर्न वर्ल्ड में पेरेंट्स अपने बच्चों को पारांपरिक तरीकों से परवरिश देने की बजाय न्यू पेरेंटिंग टेक्निक फॉलो कर रहे हैं। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग भी एक मॉडर्न पेरेंटिंग स्टाइल है। इस पेरेंटिंग का मुख्य उद्देश्य बच्चों और पेरेंट्स के बीच गैप को कम करना है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग में बच्चों और माता-पिता के बीच अच्छी बॉन्डिंग बनती है।

benefits of sitterwise parenting

benefits of sitterwise parenting

इस नए पेरेंटिंग तरीके का क्रेज क्यों बढ़ रहा है और क्या है इसके फायदे

बच्चों बनते हैं आत्मनिर्भर

सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग में बच्चे अपनी पसंद की चीजें करने के लिए फ्री होते हैं। पेरेंट्स दूर से बस उनकी एक्टिविटी को मॉनिटर करते हैं। ऐसे में जब बच्चों को खुद से चीज़ें करने और समस्याओं का सामना करने का मौका मिलता है, तो उनमें आत्मनिर्भरता बढ़ती है और वे अपनी समस्याओं को खुद हल करना सीखते हैं। यह उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।

समय की बचत और तनाव में कमी

आज की बिजी लाइफस्टाइल में माता-पिता अक्सर बच्चों के पीछे भागते-भागते थक जाते हैं। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग के जरिए वो अपने बच्चों पर नज़र तो रखते हैं, लेकिन दूर से बैठकर। जिससे समय की बचत होती है। इससे उनके तनाव में कमी आती है।

Sitterwise parenting in hindi

Sitterwise parenting in hindi

मजबूत बॉन्डिंग

यह तरीका बच्चों और माता-पिता के बीच गैप कम करने और बॉन्डिंग को मजबूत करने में मदद करता है। माता-पिता बच्चों को दूर से देखकर उनके इंट्रेस्ट और व्यक्तित्व को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।

बच्चों के लिए 'मी टाइम'

इस पेरेंटिंग स्टाइल में बच्चों को अकेला खेलने और खुद के साथ समय बिताने का मौका मिलता है, जो उनके सोचने-समझने के तरीकों को बढ़ाता है।

Ritu raj
Ritu rajauthor

<p>ऋतु राज टाइम्स नाऊ नवभारत डिजिटल में लाइफस्टाइल डेस्क में बतौर चीफ कॉफी एडिटर कार्यरत हैं। उनकी हेल्थ और लाइफस्टाइल की खबरों पर अच्छी पकड़ है। यहां वो एक्सप्लेनर और लाइफस्टाइल की ट्रेंडिंग खबरों को लोगों के लिए परोसने का काम करते हैं। उनकी फूड, पैरेंटिंग, ब्यूटी पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की। वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। ऋतु राज ने पिछले 6 सालों में एनडीटीवी, जनसत्ता जैसे बड़े संस्थानों में अलग अलग बीट्स पर काम किया है। हालांकि उनकी खास रूची न्यूज, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट में रही है। ऋतु राज एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट भी रहे हैं। उन्होंने एनडीटीवी में वॉयस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। यहां उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 को भी कवर किया और खबरों को धार देना सीखा। साल 2021 में एनडीटीवी से इस्तीफा देने के बाद ऋतुराज ने जनसत्ता के साथ जुड़े और यहां वेब स्टोरीज पर अपनी रफ्तार बनाई और अलग अलग एंगल से खबरों को बनाना सीखा।</p>

और पढ़ें
End of Article