लाइफस्टाइल

आत्मकथा लिख रहे हैं संजय मिश्रा, ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ में साझा करेंगे पर्दे के पीछे की कहानी

अभिनेता संजय मिश्रा ने अपनी पहली आत्मकथा ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ की घोषणा की है। जानें किताब कब आएगी और उन्होंने इसे अपने पिता को क्यों समर्पित किया।

Image

हम सीखते-सीखते रह गए - होगी संजय मिश्रा की आत्मकथा

नई दिल्ली: रंगमंच, टीवी और फिल्मों में अपने सहज अभिनय से पहचान बनाने वाले संजय मिश्रा अब अपनी कहानी किताब के जरिए सुनाएंगे। उन्होंने अपनी पहली पुस्तक ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ की घोषणा की है। पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित होने वाली इस आत्मकथा को जनवरी 2027 में विश्व पुस्तक मेले के दौरान पाठकों के सामने लाने की योजना है।

संजय मिश्रा के मुताबिक, किताब में उनके जीवन के वे किस्से होंगे जो अब तक पर्दे के पीछे रहे हैं। वह अपने संघर्ष, अनुभव और उनसे मिली सीख पाठकों के साथ साझा करेंगे।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और अपनी आने वाली किताब को पिता को समर्पित करते हुए उन्होंने कहा, ‘रास्ते से उठकर रजत कमल तक के सफ़र में क्या खोया, क्या पाया, पता नहीं। लेकिन पापाजी, आपके संजयवा को जब 'संजय शम्भूनाथ मिश्रा' कहकर मंच पर बुलाया गया, तब आप मेरे साथ थे, मेरी आँखों में आँसूं बनकर। सच कहता हूं, सभी बिछड़े बहुत याद आए।’

पहली बार किताब लिखने के बारे में भी संजय मिश्रा ने अपने ही अंदाज में बात की। उन्होंने कहा, ‘मैं ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूँ... फिर भी मैं लिखूँगा और आप पढ़ेंगे।’

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की भारतीय भाषाओं की प्रकाशक वैशाली माथुर ने इस घोषणा पर खुशी जताई। उन्होंने बताया कि संजय मिश्रा के पिता ने भी पेंगुइन के लिए बनारस पर एक पुस्तक लिखी थी। उनके मुताबिक, संजय मिश्रा की भाषा में सहजता और जीवन के अनुभवों से आई परिपक्वता है। उम्मीद है कि उनकी आत्मकथा अलग-अलग उम्र के पाठकों से जुड़ पाएगी।

कौन हैं संजय मिश्रा

संजय मिश्रा हिंदी सिनेमा के उन अभिनेताओं में हैं जो छोटे से किरदार को भी यादगार बना देते हैं। रंगमंच और टीवी से शुरू हुआ उनका सफर फिल्मों तक पहुंचा। ‘आंखों देखी’, ‘मसान’ और ‘कामयाब’ जैसी फिल्मों में उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से प्रभावित किया, तो ‘गोलमाल’ और ‘धमाल’ जैसी फिल्मों में अपनी कॉमेडी से दर्शकों को हंसाया। उनकी अभिनय शैली की खासियत है कि संवाद बोलते हुए भी वह अपने किरदार को बिल्कुल सहज और जाना-पहचाना बना देते हैं।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

और पढ़ें
End of Article