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क्या होता है बॉयसोबर होना? रिलेशनशिप में Boysober क्यों चुन रहे युवा, क्या हैं बॉयसोबर के फायदे और नुकसान

What is Boysober: किसी भी रिलेशनशिप में अपने पार्टनर का प्यार पाने से पहले व्यक्ति को खुद से प्यार करने की जरूरत होती है। दरअसल जब तक आप खुद से सच्चा प्यार नहीं करते, खुद को प्राथमिकता नहीं देते तो सामने वाले से इन बातों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद सेल्फ लव से ही बनती है।

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What is Boysober trend in Relationship (बॉयसोबर क्या होता है)

What is Boysober Trend in Relationship: दुनिया कॉम्प्लेक्स हो रही है और इस कॉम्प्लेक्स भरी दुनिया में रिश्ते भी कॉम्प्लैक्स हो रहे हैं। आजकल की जनरेशन में धैर्य की कमी नजर आती है। उन्हें सब कुछ जल्दी चाहिए। रिश्तों को लेकर भी उनका यही रवैया नजर आता है। वह किसी के साथ भी रिश्ता बनाने में बहुत ज्यादा नहीं सोचते। वह बहुत जल्द रिलेशनशिप में आ जाते हैं। समय के साथ उन्हें पता चलता है कि वह गलत रिलेशनशिप में आ गए हैं या फिर उनसे रिश्ता सही से चल नहीं पा रहा है। उन्हें वह रिश्ता टॉक्सिक रिलेशनशिप लगने लगता है। ऐसे उलझन भरे रिश्तों में कुछ लोग उलझ कर तनाव को अपना साथी बना लेते हैं तो वहीं कुछ लोग इस जटिलता से खुद को दूर कर रहे हैं। इन्हीं कॉम्प्लैक्सिटीज के बीच एक टर्म आजकल काफी सुर्खियां बटोर रहा है। यह टर्म है बॉयसोबर (Boysober)। आज कल युवा इस बॉयसोबर ट्रेंड को खूब अपना रहे हैं। लड़कियों या फिर महिलाओं को रिलेशनशिप का ये नया ट्रेंड खूब रास आ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर ये बॉयसोबर है क्या और क्यों ये इतना चलन में है।

क्या होता है बॉयसोबर (What is Boysober)

बॉयसोबर को अगर एक शब्द में समझा जाए तो इसका मतलब होता है सेल्फ लव। सेल्फ लव मतलब खुद से प्यार करना। बॉयसोबर एक कॉमन शब्द है, जो लड़के और लड़की दोनों के लिए ही होता है। खुद के लिए बॉयसोबर प्रैक्टिस करने का मतलब ये होता है कि आप टॉक्सिक रिलेशनशिप के साथ जीना छोड़ देते हैं। आप अपना पूरा ध्यान खुद की बेहतरी पर लगाते हैं। खुद को निखारते हैं। भविष्य में बेहतर बनने के लिए कुछ नया सीखते हैं।

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और सरल शब्द में कहा जाए तो बॉयसोबर वह परिस्थिति है जब आप दूसरों से प्यार की अपेक्षा करना बंद कर दें और सेल्फ लव ओर बढ़ चलें। बॉयसोबर का चलन आज के युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। अब लोग किसी भी तरह के टॉक्सिक रिलेशनशिप में फंसे नहीं रह रहे हैं। वह इससे बाहर निकल रहे हैं और खुद को समय दे रहे हैं और अपने भविष्य और विकास के बारे में सोच रहे हैं।

रिलेशनशिप में बॉयसोबर शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिका के मशहूर कॉमेडियन होप वुडार्ड ने किया था। सोशल मीडिया के माध्यम से यह 'बॉयसोबर' अमेरिका से निकल यूरोप तक पहुंच गया। वहां पर युवाओं ने इस प्रैक्टिस को जीवन में उतारना शुरू किया। अब ये भारत तक फैल चुका है। भारत के मेट्रो सिटीज में युवा इस प्रैक्टिस को अपना रहे हैं और फालतू के रिश्ते से बाहर निकल खुद की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं।

बॉयसोबर का महत्व (Importance of Boysober)

किसी भी रिलेशनशिप में अपने पार्टनर का प्यार पाने से पहले व्यक्ति को खुद से प्यार करने की जरूरत होती है। दरअसल जब तक आप खुद से सच्चा प्यार नहीं करते, खुद को प्राथमिकता नहीं देते तो सामने वाले से इन बातों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद सेल्फ लव से ही बनती है। अगर रिश्ते से सेल्फ लव गायब रहेगा तो वह रिलेशनशिप कभी भी ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर गिर सकता है। रिलेशनशिप में बॉयसोबर पार्टनरशिप की ऐसी नींव तैयार करता है जहां दोनों लोग एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

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बॉयसोबर के फायदे (Benefits of Boysober)

बॉयसोबर अपनाने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको अपने पार्टनर के साथ रिश्ते सुधारने के लिए उसके साथ रिलेशनशिप खत्म करने की जरूरत नहीं होती। आइए समझते हैं कि किस तरह से ये बॉयसोबर ट्रेंड कपल्स की मदद कर रहा है:

1. खुद को समझने और महत्व देने से इंसान को रोमांटिक रिश्तों में अपना 100% देने और क्लियर कम्यूनिकेशन करने में मदद मिलती है। इससे रिश्ता गहरा होता है और आप एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।

2. बॉयसोबर ट्रेंड को अपनाकर कपल्स रिश्ते की ताजगी वापस पा सकते हैं। कुछ समय की दूरी कपल्स को बेहद पास ला सकती है।

3. रिलेशनशिप में बॉयसोबर प्रैक्टिस करने से ताजगी के साथ ही दोनों पार्टनर्स में परिपक्वता भी पहले से ज्यादा आ जाती है। दोनों चीजों को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं।

4. बॉयसोबर ट्रेंड से कपल्स के रोमांटिक रिलेशनशिप में संतुलन आता है। दोनों पार्टनर्स व्यक्तिगत रूप से विकसित होते हैं और एक स्वस्थ संबंध बनता है।

5. बॉयसोबर लोगों में आत्मनिर्भरता को बढ़ाता है। जब आप खुद से प्यार करने लगते हैं तो आप ये भी समझ जाते हैं कि वो आप ही हैं जो अपने आप को खुशी मुहैया करा सकते हैं।

6. बॉयसोबर स्वास्थ्य के लिहाज से भी लोगों के लिए फायदेमंद है। रिलेशनशिप में बॉयसोबर प्रैक्टिस अपनाकर कोई भी टॉक्सिक रिलेशनशिप के अनायास तनाव से बच सकता है।

खुद के लिए कैसे अपनाएं बॉयसोबर(How to adopt Boysober in Relationship)

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आपके लिए क्या सही है और क्या गलत ये तो आपको ही तय करना है। लेकिन कुछ भी फैसला लेने से पहले ये जानना जरूरी होता है कि उस फैसला का हम पर क्या असर पड़ेगा। अगर आप खुद के लिए बॉयसोबर चुनना चाहते हैं तो आप नीचे बताए गए तरीकों को अपनाने के लिए गांठ बांध लें:

1. अगर आप रिलेशनशिप में हैं और बॉयसोबर प्रैक्टिस करना चाहते या चाहती हैं तो सबसे पहले आपको अपने पार्टनर से बात करनी चाहिए। आप उनसे अपना फैसला बताएं और उन्हें समझाएं कि आप ये क्यों कर रहे हैं।

2. बॉयसोबर ट्रेंड का मतलब यह नहीं है कि आप अपने पार्टनर से पूरी तरह दूरी बना लें। रिश्ते में संतुलन बनाए रखें और अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें।

3. बॉयसोबर प्रैक्टिस करने का मतलब ही ये है कि आप खुद को वक्त दें। ऐसे में आप अपनी रुचियों और प्राथमिकताओं को एक जगह लिख लें और बारी-बारी से उसपर अमल करें।

4. आपकी बॉयसोबर प्रैक्टिस तभी सफल होगी जब आप सेल्फ डेवलपमेंट पर काम करेंगे। आप नई चीजें सीखें, नए अनुभव प्राप्त करें और अपनी व्यक्तिगत वृद्धि के लिए प्रयास करें।

बता दें कि किसी भी तरह के रिलेशनशिप में चुनौतियां और संघर्ष का होना लाजमी है। यह हम पर तय करता है कि हम उन चुनौतियों का सामना कितनी परिपक्वता से करते हैं। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं कि आप किसी टॉक्सिक रिलेशनशिप में हैं या फिर उस तरफ बढ़ रहे हैं तो बॉयसोबर आपकी मदद कर सकता है। शायद यही सोच इस चलन को युवाओं के बीच लोकप्रिय बना रही है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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