लाइफस्टाइल

भारत का हापुस आम क्यों कहलाया अल्फांसो? क्या है Alphonso आम के नाम की कहानी

Origin Of Alphonso Mango: अल्फांसो को हापुस आम भी कहा जाता है। अल्फांसो आम की खासियत इसका सुनहरा पीला रंग, नरम गूदा और बारीक रेशे हैं, जो इसे अन्य आमों से अलग बनाते हैं। अल्फांसो की लोकप्रियता ने इसे भारत का गौरव बनाया है। इसे GI टैग (Geographical Indication) भी मिला है।

Image

कैसे पड़ा अल्फांसो आम का नाम?

How Mango Named Alphonso: भारत में आम की करीब 1500 प्रजातिया हैं। हर तरह के आम की अलग खासियत और स्वाद है। कोई लंगड़ा आम का दीवाना है तो किसी को दशहरी आम का चस्का होता है। वैसे क्या आपने सोचा है कि आम के नाम कैसे पड़े होंगे। हम आपको हर आम के नाम के पीछे की कहानी से रूबरू कराएंगे। इसी कड़ी में आज बात करते हैं अल्फांसो आम की। अल्फांसो को भारत में आमों का राजा कहा जाता है। यह अपनी मिठास, सुगंध और रसीलेपन के लिए विख्यात है।

11

फलों का राजा आम

अल्फांसो आम के नाम की कहानी की जड़ें सैकड़ों साल पुराने इतिहास और औपनिवेशिक प्रभावों से जुड़ी है। अल्फांसो आम का नाम पुर्तगाली नाविक और गवर्नर अफोंसो डी अल्बुकर्क (Afonso de Albuquerque) के नाम पर पड़ा। अफोंसो ने 16वीं सदी की शुरुआत में भारत के पश्चिमी तट पुर्तगाली शासन स्थापित किया था। उस दौरान पुर्तगालियों ने भारत में कई तरह के फसल और पेड़-पौधे लगाए। अल्फांस आम भी उसी में से एक है।

14

अल्फांसो आम

अल्फांसो आम की उत्पत्ति महाराष्ट्र के रत्नागिरी और कोकण क्षेत्र में मानी जाती है। माना जाता है कि पुर्तगालियों ने 15वीं और 16वीं सदी में भारत में आम की कई किस्मों को विकसित करने के लिए कलम बांधने (ग्राफ्टिंग) की तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्थानीय आमों को बेहतर बनाकर एक नई किस्म तैयार की, जिसे बाद में 'अल्फांसो' नाम दिया गया। यह नाम अफोंसो डी अल्बुकर्क के सम्मान में रखा गया, क्योंकि उन्होंने भारत में पुर्तगाली प्रभाव को मजबूत किया और कृषि विकास में योगदान दिया।

13

हापुस आम

अल्फांसो को हापुस आम भी कहा जाता है। अल्फांसो आम की खासियत इसका सुनहरा पीला रंग, नरम गूदा और बारीक रेशे हैं, जो इसे अन्य आमों से अलग बनाते हैं। अल्फांसो की लोकप्रियता ने इसे भारत का गौरव बनाया है। इसे GI टैग (Geographical Indication) भी मिला है। अल्फांसो आम का नाम इतिहास और स्वाद का एक अनूठा संगम है, जो पुर्तगाली प्रभाव और भारतीय मिट्टी की कहानी को जोड़ता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article