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Waqt Shayari: यहां देखें वक्त पर मोटिवेशनल शायरी, खराब समय पर शायरी से हौसले करें बुलंद

Waqt Shayari in Hindi (समय पर दो शायरी लाइनें क्या हैं), Waqt Shayari Urdu in Hindi: वक्त हमें सिखाता है कि सब कुछ बदल जाता है। बच्चे बड़े होते हैं, रिश्ते पुराने हो जाते हैं, सपने साकार होते हैं या टूट जाते हैं। लेकिन वक्त कभी किसी का साथ नहीं छोड़ता।

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वक्त पर शायरी

Waqt Shayari in Hindi on life (वक्त पर शायरी): वक्त वो है जो न तो किसी के लिए रुकता है, न किसी की बात मानता है। यह तो चलता रहता है। कभी तो बड़ी तेजी से बीत जाता है, तो कभी काटे नहीं कटता। लगता है जैसे घड़ी की सुइयां थम सी गई हों। वक्त की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सबको बराबर समय देता है। अमीर-गरीब, राजा-प्रजा, सफल-असफल..सबको एक दिन में 24 घंटे ही मिलते हैं। फर्क सिर्फ इस बात का है कि हम उस वक्त का क्या करते हैं। इसी वक्त पर बहुत से शायरों ने कमाल के शेर लिखे हैं। ये शेर समय की खूबसूरती को और भी ज्यादा बेहतर तरीके से बयां करते हैं। आइए पढ़ें वक्त पर शायरी हिंदी में:

वक्त पर शायरी (Waqt Motivational Shayari)

1. वक्त रहता नहीं कहीं टिक कर

आदत इस की भी आदमी सी है

- गुलज़ार

2. वक्त करता है परवरिश बरसों

हादिसा एक दम नहीं होता

- क़ाबिल अजमेरी

3. वक्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'

ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी

- नासिर काज़मी

4. जब आ जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर

तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूं नहीं आते

- इबरत मछलीशहरी

5. या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से

कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है

- जिगर मुरादाबादी

6. वक्त बर्बाद करने वालों को

वक्त बर्बाद कर के छोड़ेगा

- दिवाकर राही

7. वक्त की गर्दिशों का ग़म न करो

हौसले मुश्किलों में पलते हैं

- महफूजुर्रहमान आदिल

8. वक्त किस तेज़ी से गुज़रा रोज़-मर्रा में 'मुनीर'

आज कल होता गया और दिन हवा होते गए

- मुनीर नियाज़ी

9. सुब्ह होती है शाम होती है

उम्र यूं ही तमाम होती है

- मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम

10. सदा ऐश दौरां दिखाता नहीं

गया वक्त फिर हाथ आता नहीं

- मीर हसन

11. उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की याद

वक्त कितना क़ीमती है आज कल

- शकील बदायूनी

12. इक साल गया इक साल नया है आने को

पर वक्त का अब भी होश नहीं दीवाने को

- इब्न-ए-इंशा

13. अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना

हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है

- बशीर बद्र

14. कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं

जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला

- अब्दुल हमीद अदम

15. सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें

क्या बात है मैं वक्त पे घर क्यूँ नहीं जाता

- निदा फ़ाज़ली

16. ग़ज़ल उस ने छेड़ी मुझे साज़ देना

ज़रा उम्र-ए-रफ़्ता को आवाज़ देना

- सफ़ी लखनवी

17. और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम

अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए

- जौन एलिया

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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