Parenting Tips: बहुत से पेरेंट्स की शिकायत होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई से भागता है। जैसे ही उसे पढ़ाई के लिए बैठने को कहा जाता है, वह रोने लगता है, बहाने बनाने लगता है या चिड़चिड़ा हो जाता है। गुस्से में आकर कई बार माता पिता बच्चे पर हाथ छोड़ देते हैं। लेकिन ऐसा करना कोई आखिरी विकल्प नहीं होता। कुछ तरीके अपनाकर बच्चों की ये आदत आप छुड़ा सकते हैं। हालांकि पेरेंट्स को सबसे पहले ये समझना होगा कि बच्चा पढ़ाई से भाग क्यों रहा है।
बच्चा पढ़ाई के नाम पर क्यों रो रहा है, यह जानना सबसे जरूरी है। हो सकता है कि उसे कोई विषय कठिन लगता हो, स्कूल में किसी बात को लेकर तनाव हो या फिर पढ़ाई का दबाव उसकी क्षमता से ज्यादा महसूस हो रहा हो। बिना कारण समझे केवल डांटना या मारना समस्या को और बढ़ा सकता है।
क्या करें पेरेंट्स
सजा ना लगे पढ़ाई
कई घरों में पढ़ाई को "खेल खत्म, अब पढ़ाई करो" जैसे वाक्यों से जोड़ा जाता है। इससे बच्चे के मन में यह धारणा बन सकती है कि पढ़ाई कोई बोझ या सजा है। कोशिश करें कि पढ़ाई को एक रोचक गतिविधि की तरह पेश करें।
छोटी सिटिंग्स में पढ़ाएं
बच्चे को एक साथ लंबे समय तक पढ़ने के लिए मजबूर न करें। 15-20 मिनट की छोटी सिटिंग्स बनाएं और बीच-बीच में थोड़ा ब्रेक दें। जब बच्चा एक छोटा लक्ष्य पूरा कर ले, तो उसकी तारीफ जरूर करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक भावना विकसित होगी।
तुलना ना करें
किसी और से बच्चे की तुलना ना करें। ऐसी बातें बच्चे के मन में हीनभावना पैदा कर सकती हैं। हर बच्चे की सीखने की गति और रुचियां अलग होती हैं। तुलना करने के बजाय उसकी अपनी प्रगति पर ध्यान दें और उसे बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करें।
इमोशनल सपोर्ट बनें
अगर बच्चा पढ़ते समय रो रहा है, तो पहले उसे शांत होने का समय दें। उसकी बात सुनें और यह महसूस कराएं कि आप उसकी परेशानी को समझते हैं। जब बच्चा सुरक्षित और समझा हुआ महसूस करता है, तो वह अपनी कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात करने लगता है।
कब लें एक्सपर्ट की मदद
अगर बच्चा लगातार पढ़ाई से डरे, हद से ज्यादा तनाव महसूस करे या सीखने में असामान्य कठिनाई झेल रहा है, तो किसी काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
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बतौर पेरेंट्स हमें यह समझना होगा कि कई बार दबाव, डर या गलत तरीके उसके भीतर पढ़ाई के प्रति नकारात्मक भावनाएं पैदा कर देते हैं। प्यार, धैर्य और सही मार्गदर्शन के साथ बच्चे को सीखने की प्रक्रिया से दोबारा जोड़ा जा सकता है। पढ़ाई का उद्देश्य केवल अच्छे अंक नहीं, सीखने की खुशी विकसित करना भी है।
