अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान ट्रंप एक बार फिर अपना बड़बोलापन दिखाते हुए दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए सैन्य संघर्ष को रुकवाया था। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव उन आठ संघर्षों में शामिल था, जिन्हें उन्होंने रुकवाया था।हालांकि,भारत लगातार उनके इस दावे को खारिज करता आया है।
ट्रंप ने कहा- आठ युद्ध सुलझाए
न्यूयॉर्क में UNGA के जनरल डिबेट को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, 'राष्ट्रपति बनने के बाद मुझे आठ संघर्षों को सुलझाने में सफलता मिली है, इन संघर्षों में से कई वर्षों या दशकों से चले आ रहे थे। आठ युद्धों को समाप्त करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात रही है। ऐसा करके मैंने इनमें से कई देशों के नेताओं के साथ दोस्ताना संबंध भी बनाए हैं। यह करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी।' ट्रंप ने कहा कि इन जंगों को रुकवाना आसान नहीं था, लेकिन मेरे व्यक्तिगत संबंधों, व्यापार, टैरिफ लगाने की धमकी समेत कई अन्य उपायों से मैं इसमें सफल हो पाया।ट्रंप ने कहा जिन देशों की जंग मैंने रुकवाई उनमें कंबोडिया और थाईलैंड,कोसोवो और सर्बिया,कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा, पाकिस्तान और भारत, आर्मेनिया और अजरबैजान शामिल हैं। इसके साथ ही गाजा में जारी जंग भी। जैसा कि मैंने पहले कहा था कि सभी बंधकों की वापसी कराएंगे, चाहे वे जीवित हों या मृत। इतना ही नहीं ट्रंप ने यह भी कहा कि इन सभी देशों ने उन्हें "धन्यवाद पत्र" भी लिखा था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भी किया जिक्र
ट्रंप ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि 'धन्यवाद पत्र में शहबाज ने कहा कि प्रेसीडेंट ट्रंप आपने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोका। और आपकी वजह से 3 करोड़ लोगों की जान बची, संभवतः इससे भी ज्यादा।'10 मई 2025 को क्या हुआ था?
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव तेजी से बढ़ा था। इसके बाद 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। फिर दोनों देशों के बीच करीब तीन दिन सैन्य कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई हुई। फिर 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि भारत और पाकिस्तान तत्काल और पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उस समय ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुई लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई।
भारत ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को नहीं माना
भारत ने शुरुआत से ही इस घटनाक्रम को अमेरिकी मध्यस्थता के तौर पर पेश किए जाने से अलग रुख रखा है। ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संवाद के दौरान बनी थी।विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच 10 मई को फोन पर बातचीत हुई और इसी दौरान गोलीबारी तथा सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर समय और शर्तों पर सहमति बनी।भारत ने यह भी कहा था कि उस दौरान अमेरिका और भारत के नेताओं के बीच बातचीत जरूर हुई थी, लेकिन व्यापार का मुद्दा इन चर्चाओं में नहीं आया था। यह बात ट्रंप के उस दावे से अलग थी, जिसमें उन्होंने टैरिफ और व्यापार का इस्तेमाल कर दोनों देशों को संघर्ष रोकने के लिए राजी करने की बात कही थी।
पिछले साल UNGA में भी किया था दावा
ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रुकवाने का दावा पहली बार नहीं किया है। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान भी उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में भूमिका निभाई थी। इसके बाद भी भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सैन्य कार्रवाई रोकने की व्यवस्था दोनों देशों के DGMOs के बीच सीधे संपर्क से बनी थी।
बता दें कि ट्रंप का भाषण सुनने के लिए प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप,अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर भी मौजूद थे। संयुक्त राष्ट्र का 81वां महासभा सत्र 22 से 28 सितंबर तक चल रहा है। इस हाई-लेवल वीक में करीब 130 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख व्यक्तिगत रूप से हिस्सा ले रहे हैं।
