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बारिश आते ही क्यों मुरझाने लगती है तुलसी? वजह और बचाव दोनों जान लीजिए

Tulsi Plant Care in Monsoon: नमी के कारण कई बार पत्तियां काली या पीली होने लगती हैं। ऐसी पत्तियों को तुरंत तोड़ दें ताकि फंगल इन्फेक्शन पूरे पौधे में न फैले।

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मानसून में कैसे रखें तुलसी का ध्यान (AI Image)

Tulsi Plant Care in Monsoon: भारतीय घरों में तुलसी का पौधा बहुत आम है। इसे लोग कई कारणों से अपने घर पर लगाते हैं। तुलसी ऐसा पौधा है जिसे हर मौसम में खास केयर की जरूरत होती है। मानसून आने वाला है। बरसात का मौसम भी तुलसी के पौधे को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। लगातार बारिश, नमी और धूप की कमी के कारण इसकी जड़ें सड़ सकती हैं और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। अगर कुछ आसान बातों का ध्यान रखा जाए तो बारिश के मौसम में भी तुलसी स्वस्थ और हरी-भरी बनी रह सकती है।

ज्यादा पानी देने से बचें

मानसून में सबसे बड़ी गलती लोग पौधे को रोजाना पानी देने की करते हैं। जब पहले से ही मिट्टी में नमी हो, तो अतिरिक्त पानी जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। पानी देने से पहले उंगली से मिट्टी जांच लें। अगर मिट्टी गीली महसूस हो रही है तो उस दिन पानी देने की जरूरत नहीं है।

अच्छी जल निकासी वाला गमला चुनें

तुलसी के गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए। गमले के नीचे पर्याप्त ड्रेनेज होल होना जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। अगर पानी रुक गया तो जड़ें गलने लगेंगी और पौधा धीरे-धीरे सूख सकता है।

धूप मिलने वाली जगह पर रखें

बारिश के दिनों में भी तुलसी को रोज कम से कम 3 से 4 घंटे की हल्की धूप मिलनी चाहिए। यदि लगातार बारिश हो रही हो तो गमले को ऐसी जगह रखें जहां रोशनी आती रहे लेकिन तेज बारिश सीधे पौधे पर न पड़े।

पीली और सड़ी पत्तियां हटाते रहें

नमी के कारण कई बार पत्तियां काली या पीली होने लगती हैं। ऐसी पत्तियों को तुरंत तोड़ दें ताकि फंगल इन्फेक्शन पूरे पौधे में न फैले। समय-समय पर सूखी टहनियों की हल्की छंटाई करने से नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं।

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प्राकृतिक खाद का करें इस्तेमाल

मानसून के दौरान हर 20 से 25 दिन में थोड़ी-सी वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी हुई खाद डाल सकते हैं। इससे पौधे को जरूरी पोषण मिलता है और उसकी बढ़वार अच्छी रहती है। बहुत अधिक खाद डालने से बचें क्योंकि इससे जड़ें प्रभावित हो सकती हैं।

फंगल इन्फेक्शन पर रखें नजर

अगर पत्तियों पर सफेद धब्बे, फफूंदी या कीड़े दिखाई दें तो तुरंत नीम के तेल का हल्का घोल छिड़कें। यह प्राकृतिक तरीका पौधे को नुकसान पहुंचाए बिना कई तरह के संक्रमण से बचाने में मदद करता है।

हवा का भी रखें ध्यान

तुलसी को ऐसी जगह रखें जहां अच्छी हवा आती-जाती रहे। बंद और अत्यधिक नम वातावरण में फंगस तेजी से पनपता है। खुले बरामदे या बालकनी का स्थान इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

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तो कुल मिलाकर मानसून में तुलसी की देखभाल का मूल मंत्र है- कम पानी, पर्याप्त धूप और अच्छी जल निकासी। थोड़ी-सी सावधानी और नियमित निगरानी से आपका तुलसी का पौधा पूरे बारिश के मौसम में भी हरा-भरा रहेगा और घर में सकारात्मक ऊर्जा के साथ औषधीय लाभ भी देता रहेगा।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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