Thalapathy Vijay Religion: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय अपनी फिल्मों के साथ-साथ निजी जीवन और अब राजनीति को लेकर भी चर्चा में हैं। उनकी पार्टी ने तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीत कर सभी को हैरान कर दिया है। इसी बीच उनके धर्म को लेकर कई बार मुद्दा बनाने का प्रयास किया गया लेकिन विजय की साफ छवि बाकी सभी चीजों पर भारी पड़ी।
जन्म से ईसाई, सोच में सर्वधर्म समभाव
थलापति के नाम से मशहूर विजय का जन्म एक ईसाई परिवार में हुआ था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर ईसाई हैं, जबकि उनकी मां शोभा चंद्रशेखर हिंदू हैं। वहीं उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम हिंदू परंपराओं से जुड़ी हैं। ऐसे में उनके जीवन में विभिन्न धर्मों की झलक साफ दिखाई देती है। (बता दें कि विजय और संगीता के अलगाव की खबरें भी जोरों पर हैं। )
विजय खुद कई बार यह कह चुके हैं कि वे सभी धर्मों का समान सम्मान करते हैं और ईश्वर में उनकी गहरी आस्था है, चाहे वह किसी भी रूप में हो।
मंदिर, चर्च और दरगाह- हर जगह आस्था
विजय को कई मौकों पर मंदिरों में दर्शन करते, चर्च में प्रार्थना करते और दरगाह पर माथा टेकते देखा गया है। यह उनके उस विचार को दर्शाता है, जिसमें धर्म से ज्यादा इंसानियत और आस्था को महत्व दिया गया है। यही वजह है कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान विजय की धार्मिक पहचान भी चर्चा का विषय बनी। लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया, जो धर्म से ऊपर उठकर लोगों के मुद्दों पर बात करता है।
विजय ने अपने एक इंटरव्यू में बताया भी था कि वह ईसाई धर्म में पैदा हुए थे, लेकिन उनकी मां और पत्नी हिंदू हैं और वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। यही बात उनकी बड़ी जीत का आधार भी बनी है।
पहली ही पारी में ऐतिहासिक प्रदर्शन
इसी चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत लीं। यह किसी भी नई पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। TVK राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, हालांकि वह बहुमत के आंकड़े 118 से थोड़ी पीछे रह गई। इसके बावजूद विजय का यह राजनीतिक डेब्यू बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है और उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि विजय भले ही जन्म से ईसाई हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक धर्म तक सीमित नहीं है। राजनीति में उनकी एंट्री और पहली ही बार में मिला जबरदस्त जनसमर्थन यह दिखाता है कि लोग उनके विचारों और व्यक्तित्व को कितना स्वीकार कर रहे हैं। विजय की छवि एक ऐसे सार्वजनिक व्यक्ति की बनकर उभरी है जो अपनी निजी धार्मिक पहचान को लेकर स्पष्ट हैं, लेकिन उसे राजनीति का केंद्र नहीं बनाते।
