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आज की शायरी: इश्क, समाज और आत्मसम्मान के टकराव को बयां करता है यह शेर

Aaj ki Shayari (आज की शायरी): मौलाना मोहम्मद अली जौहर का यह शेर इश्क की उस अवस्था को दर्शाता है जहां प्रेमी की दीवानगी ही प्रेमिका की इज्जत की रक्षा करने लगती है। यह इश्क की इंतिहा है, जहां खुद को खो देना भी किसी और को बचाने का जरिया बन जाता है।

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आज की शायरी (Aaj ki Shayari)

Shayari of the day (आज की शायरी): आज की शायरी में शामिल है मौलाना मोहम्मद अली जौहर का एक मशहूर शेर। मौलाना मोहम्मद अली जौहर उर्दू के उन मुक्कम शायरों में से एक रहे जो बेहद बेबाकी और साफगोई अपनी बातें लोगों तक पहुंचा देते थे। उनके शब्दों में ऐसा जादू था कि पढ़ने वालो को लगता कि ये शेर उन्ही के लिए लिखा गया है। आज हम जिस शेर की बात करने जा रहे हैं वह इश्क, समाज और आत्मसम्मान के टकराव को बेहद गहराई से बयां करता है। यह शेर कुछ इस तरह से है:

"सारी दुनिया ये समझती है कि सौदाई है

अब मिरा होश में आना तिरी रुस्वाई है"

इस शेर में सौदाई का अर्थ है दीवाना, पागल या होश-हवास खो बैठा व्यक्ति। शायर स्वीकार करता है कि दुनिया उसे प्रेम में डूबा, बेखुद और अकल से दूर समझती है। समाज की निगाह में उसका इश्क जुनून है, समझदारी नहीं। लोग यह मान चुके हैं कि वह प्रेम के कारण अपनी मर्यादा, होश और सामाजिक नियमों को भूल बैठा है।

लेकिन शेर की असली गहराई दूसरे मिसरे में है- अब मिरा होश में आना तिरी रुस्वाई है। यहां शायर प्रेमिका से मुखातिब है। वह कहता है कि अब अगर मैं अचानक होश में आ जाऊं, समझदार बन जाऊं, तो बदनामी तुम्हारी होगी। क्यों? क्योंकि मेरी दीवानगी, मेरा पागलपन ही इस प्रेम की सच्चाई और गहराई का सबूत बन चुका है। अगर मैं सुधर गया, पीछे हट गया, तो दुनिया यह सोचेगी कि प्रेम झूठा था या तुमने मुझे ठुकरा दिया।

इस शेर में प्रेमी अपनी बदनामी को ढाल की तरह इस्तेमाल करता है। वह कहता है कि मेरी दीवानगी अब सिर्फ मेरी नहीं रही, यह तुम्हारी इज्जत से भी जुड़ गई है। मेरा पागलपन तुम्हारे प्रेम की गवाही बन चुका है। अब अगर मैं सामान्य हो गया, तो उंगलियां तुम पर उठेंगी, सवाल तुम्हारे प्रेम पर होंगे।

यह शेर समाज की उस मानसिकता पर भी चोट करता है जहां प्रेम को अकसर पागलपन कहा जाता है, लेकिन उसी समाज में प्रेम से पीछे हट जाना चरित्र पर सवाल खड़े कर देता है। शायर इस दोहरे मापदंड को उजागर करता है।

भावनात्मक रूप से यह शेर आत्मसमर्पण और बलिदान की भावना दिखाता है। प्रेमी कह रहा है कि मैं अपनी छवि, अपना होश, अपना नाम सब दांव पर लगा चुका हूं। अब पीछे हटने का रास्ता नहीं है, क्योंकि मेरा सुधरना तुम्हारी बदनामी बन जाएगा।

सरल शब्दों में कहें तो यह शेर इश्क की उस अवस्था को दर्शाता है जहां प्रेमी की दीवानगी ही प्रेमिका की इज्जत की रक्षा करने लगती है। यह इश्क की इंतिहा है, जहां खुद को खो देना भी किसी और को बचाने का जरिया बन जाता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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